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स्त्री पुरुष संबंध के बारे में यह क्या कहता है मनुस्मृति

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शास्त्रों में ऐसी कथाएं हैं कि ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि निर्माण का काम शुरु किया तो अपने योग बल से जीवों को उत्पन्न किया। ब्रह्मा जी ने देखा कि इस विधि से अगर सृष्टि का विकास हुआ तो सृष्टि का विस्तार होने में काफी समय लग जाएगा।
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ब्रह्मा जी की इस समस्या का हल भगवान शिव ने निकाल और अपने तेज से एक स्त्री को उत्पन्न किया। और मैथुनी व्यवस्था से सृष्टि के विकास की व्यवस्था की। इस तरह स्त्री पुरुष के मिलन से संसार का विकास हुआ।

स्त्री पुरुष का मिलन तभी होना चाहिए

शास्त्रों के अनुसार इस व्यवस्था के तहत स्त्री और पुरुष का मिलन तभी होना चाहिए जब संतान की इच्छा हो। स्त्री पुरुष संबंध आनंद का विषय नहीं है। प्रकृति में इस नियम का पालन सभी जीव जंतु करते हैं।

शास्त्रों में कई ऐसे उदाहरण मौजूद हैं जिससे यह ज्ञात होता है कि उन दिनों संतान की कामना होने पर ही स्त्री पुरुष संसर्ग करते थे। अन्य समय में मित्रवत रहते हुए पति पत्नी सामाजिक क्रिया का निर्वाह करते थे।

मनुस्मृति में स्त्री पुरुष संबंध

आज से करीब चार हजार साल पहले लिखा गई थी 'मनुस्मृति'। इस ग्रंथ में स्त्री पुरुषों के संबंध को लेकर कुछ नियमों का जिक्र किया गया है।

इन नियमों में ऋतुकाल में स्त्री पुरुषों के संबंध की मनाही की गई है। साथ ही बताया गया है कि स्त्री पुरुषों को काम भावना पर नियंत्रण रखना चाहिए और अतिशय संबंध बनाने से बचना चाहिए।

स्त्री पुरुष संबंध की आयु

मनुस्मृति के अनुसार स्त्री पुरुषों को जीवन के दूसरे भाग में गृहस्थ जीवन बितना चाहिए। इस दौरान इनके बीच में संतान प्राप्ति और सृष्टि चक्र को बनाए रखने के लिए संबंध अनुकूल है।

जीवन का दूसरा भाग 25 से 50 वर्ष के बीच माना जाता है। इस उम्र में आनंद प्राप्ति के लिए अधिक संबंध बनाने से उम्र के तीसरे पड़ाव में आकर अंग स्थिल पड़ने लगते हैं। शरीर में कई प्रकार के रोग उत्पन्न होने लगते हैं।
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विज्ञान की दृष्टि से स्त्री पुरुष संबंध

मनुस्मृति करीब 4000 साल पहले लिखी गई थी। उस समय से लेकर अब तक विज्ञान ने कई सारी उपलब्धियां हासिल की है। इनमें गर्भनिरोध के कई उपाय भी शामिल हैं। संभव है कि उन दिनों जनसंख्या पर नियंत्रण रखने के कारगर उपाय नहीं रहे होंगे। इसलिए जनसंख्या पर नियंत्रण रखने के लिए यह नियम बनाया गया हो।

वर्तमान में चिकित्सा विज्ञान कहता है कि स्त्री पुरुष संबंध सिर्फ संतान पैदा करने के लिए नहीं है। इससे स्वास्थ्य पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में मनुस्मृति और आधुनिक विज्ञान का मत दो दिशाओं में ले जाता है। आप ही तय करिए कि आप किस ओर जाना चाहेंगे।
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