भगवान श्री कृष्ण धरती पर विष्णु के अवतार माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि उड़ीसा स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान आज भी मनुष्य रुप में विराजमान रहते हैं। इसलिए इनकी देख-रेख सेवा सत्कार मनुष्य की तरह ही होती है।
अगर भगवान भी मनुष्य रुप में हैं तो उनका बीमार होना भी स्वभाविक है। माना जाता है कि जब भगवान धरती पर मानव रुप में लीला दिखाने आए थे तब स्नान पूर्णिमा यानी ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन अधिक स्नान करने से बीमार हो गए थे।
इसलिए हर वर्ष उस घटना को याद करते हुए स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान को 108 घड़ों के जल से स्नान कराया जाता है। इस स्नान से भगवान बीमार हो जाते हैं।