महावीर जयंती 2021
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महावीर स्वामी ब्रह्मचर्य के बारे में अपने बहुत ही अमूल्य उपदेश देते हैं कि ब्रह्मचर्य उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चारित्र, संयम और विनय की जड़ है। तपस्या में ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ तपस्या है। ब्रह्मचर्य का अर्थ है अपनी आत्मा में लीन हो जाना या अपने अंदर छिपे ब्रह्म को पहचानना। बाहर के लोग आपको अशांत करते हैं इसलिए यदि आप दुनिया की परवाह छोड़कर सिर्फ अपने मन की शांति की दिशा में काम करेंगे तो आप ब्रह्मचारी कहलाएंगे।