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Ekadashi 2021: इस दिन है वरुथिनी एकादशी, जानिए महत्व, तिथि और पूजा विधि

Sat, 24 Apr 2021 03:08 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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वरुथिनी एकादशी 2021
हर माह में दो पक्ष होते हैं कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। दोनों पक्षों की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। इस तरह से एक मास में दो बार और पूरे साल में 24 एकादशी तिथि पड़ती हैं। सनातन धर्म में एकादशी को सभी व्रतों में श्रेष्ठ बताया गया है। यह तिथि भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित की जाती है। वैशाख मास में कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी व्रत को वरुथिनी या बरुथिनी एकादशी कहा जाता है। इस बार वरुथिनी एकादशी का व्रत 7 मई 2021 दिन शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन व्रत रखने और विधिवत पूजन करने से सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में शांति आती है। जानिए वरुथिनी एकादशी व्रत महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
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वरुथिनी एकादशी 2021
एकादशी शुभ मुहूर्त-
 
एकादशी तिथि आरंभ - 06 मई 2021 को दोपहर 02 बजकर 10 मिनट से
 
एकादशी तिथि समाप्त - 07 मई 2021 को शाम 03 बजकर 32 मिनट तक
 
द्वादशी तिथि समाप्त- 08 मई को शाम 05 बजकर 35 मिनट पर
 
एकादशी व्रत पारण समय- 08 मई को प्रातः 05 बजकर 35 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 16 मिनट तक
 
पारण की कुल अवधि - 2 घंटे 41 मिनट
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वरुथिनी एकादशी 2021
वरुथिनी एकादशी व्रत महत्व-
वरुथिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करने का विधान है। मान्यता अनुसार जितना पुण्य कन्यादान और वर्षों तक तप करने से प्राप्त होता है उतना ही पुण्य वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से मिलता है यह एकादशी दरिद्रता का नाश करने वाली और कष्टों से मुक्ति दिलाने वाली मानी गई है। इस दिन व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य आता है। मनुष्य के सभी पापों का अंत होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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वरुथिनी एकादशी 2021 - फोटो : lord vishnu (demo pic)
वरुथिनी एकादशी व्रत विधि-
  • दशमी तिथि (एकादशी से एक दिन पहले) को शाम के समय सूर्यास्त के बाद भोजन ग्रहण न करें।
  • एकादशी पर प्रातः उठकर स्नानादि  करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • इसके बाद एक चौकी पर गंगाजल छिड़क कर स्वच्छ करें और आसन बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
  •  इसके बाद धूप दीप प्रज्जवलित करें और तिलक करें
  • भगवान विष्णु को गंध, पुष्प आदि अर्पित करें, इसके साथ ही तुलसी भी अर्पित करें। अब पूरे दिन व्रत करें।
  • द्वादशी तिथि यानी अगले दिन सुबह स्नान करके पूजा करें और किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं। इसके बाद स्वयं भी शुभ मुहूर्त में व्रत खोलें
 
 
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