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Magh Month 2022: पौष पूर्णिमा से माघ माह आरंभ, जानिए महत्व और प्रमुख व्रत-त्योहार

Sun, 16 Jan 2022 10:46 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Magh Month 2022: प्रयाग में हर वर्ष लगने वाले इस माघ मेले को कल्पवास भी कहा जाता है। वेद, मंत्र व यज्ञ आदि कर्म ही 'कल्प' कहे जाते है। पुराणों में माघ मास के समय संगम के तट पर निवास को ही कल्पवास कहा जाता है।
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Magh Month 2022: माघ स्नान करने वाले मनुष्यों पर भगवान विष्णु प्रसन्न रहते है तथा उन्हें सुख-सौभाग्य, धन-संतान और मोक्ष प्रदान करते है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Magh Month 2022: स्नान और दान कर पुण्य अर्जित करने के लिए माघ का महीना बहुत ही उत्तम माना गया है। मोक्ष प्रदान करने वाला माघ स्नान पौष पूर्णिमा से आरम्भ होकर माघ पूर्णिमा को समाप्त होता है। माघ मास की ऐसी ही महिमा है कि इसमें जहां कही भी जल हो वह गंगाजल के सामान ही होता है फिर भी प्रयाग, कुरुक्षेत्र, हरिद्धार, काशी , नासिक, उज्जैन तथा अन्य पवित्र तीर्थों और नदियों में स्नान का बड़ा महत्व है। माघ स्नान करने वाले मनुष्यों पर भगवान विष्णु प्रसन्न रहते है तथा उन्हें सुख-सौभाग्य, धन-संतान और मोक्ष प्रदान करते है।

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क्या होता है कल्पवास
प्रयाग में हर वर्ष लगने वाले इस माघ मेले को कल्पवास भी कहा जाता है। वेद, मंत्र व यज्ञ आदि कर्म ही 'कल्प' कहे जाते है। पुराणों में माघ मास के समय संगम के तट पर निवास को ही कल्पवास कहा जाता है। संयम,अहिंसा व श्रद्धा ही कल्पवास का मूल आधार होता है।

माघ स्नान का महत्व
माघ मास में जो मनुष्य प्रयाग या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करता है उसे एक विशेष प्रकार की सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है जिससे उसका शरीर निरोगी और आध्यात्मिक शक्ति से संपन्न हो जाता है। माघ स्नान से व्यक्ति के समस्त पाप जलकर भस्म हो जाते है एवं इस मास में पूजन-अर्चन व स्नान करने से भगवान विष्णु का सानिध्य प्राप्त होता है। स्कंद पुराण के अनुसार इस मास में शीतल जल में डुबकी लगाने से मनुष्य पाप मुक्त होकर स्वर्ग चले जाते है। 
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माघ माह के स्नान, दान, उपवास और माधव पूजा का महत्व बताते हुए अनेक धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इन दिनों में प्रयागराज में अनेक तीर्थों का समागम होता है और 33 कोटि देवी-देवता यहां आते हैं, इसलिए जो प्रयाग या अन्य पवित्र नदियों में भी भक्तिभाव से स्नान करते है वह तमाम पापों से मुक्त होकर स्वर्गलोक के अधिकारी हो जाते है। धर्मराज युधिष्ठिर ने महाभारत युद्ध के दौरान मारे गए अपने रिश्तेदारों को सदगति दिलाने हेतु मार्कण्डेय ऋषि के कहने पर कल्पवास किया था। गौतमऋषि द्वारा शापित इंद्रदेव को भी माघ स्नान के कारण श्राप से मुक्ति मिली थी। माघ के धार्मिक अनुष्ठान के फलस्वरूप प्रतिष्ठानपुरी के नरेश पुरुरवा को अपनी कुरूपता से मुक्ति मिली थी। मान्यता है कि प्रयाग में माघ मास में तीन बार स्नान करने का फल दस हज़ार अश्वमेघ यज्ञ से भी ज्यादा होता है।

माघ माह के व्रत-त्योहार
माघ माह के दौरान कृष्ण पक्ष में सकट चौथ(गणेश चतुर्थी व्रत )षटतिला एकादशी, मौनी अमावस्या आती है तो शुक्ल पक्ष में वरदतिलकुन्द-विनायक चतुर्थी, वसंत पंचमी, शीतला षष्ठी, रथ-अचला सप्तमी, जया एकादशी व्रत और माघी पूर्णिमा जैसे पर्व आते हैं।

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