मकर संक्रांति के दिन किसी भी
पवित्र नदी एवं तालाब में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष तौर पर
इस दिन गंगा स्नान का खास महत्व है। इसलिए हर वर्ष गंगा तटों पर खासतौर पर हरिद्वार
एवं प्रयाग में मकर संक्रांति के दिन मेला लगता है। इस वर्ष प्रयाग में महाकुंभ लगा
है इसलिए इस वर्ष प्रयाग तट का महत्व और भी बढ़ गया है। लेकिन इससे कोलकाता स्थित
गंगा सागर का महत्व कमतर नहीं हुआ है।
शास्त्रों में कहा गया है कि मकर
संक्रांति के दिन गंगासागर में स्नान और दान का जो महत्व है वह कहीं अन्यत्र नहीं
है। इसलिए कहा जाता है सारे तीरथ बार-बार गंगा सागर एक बार। कहने का तात्पर्य यह है
कि सभी तीर्थों में कई बार यात्रा का जो पुण्य होता है वह मात्र एक बार गंगा सागर
में स्नान और दान करने से प्राप्त हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार गंगा सागर में
एक डुबकी लगाने से 10 अश्वमेघ यज्ञ एवं एक हजार गाय दान करने का पुण्य मिलता है।
मकर संक्रांति के मौके पर गंगा सागर का महत्व इसलिए है क्योंकि शास्त्रों
में वर्णित है कि मकर संक्रांति के दिन ही गंगा शिव की जटा से निकलकर चलकर ऋषि कपिल
मुनि के आश्रम में पहुंची थी। यहां गंगा कपिल मुनि के श्राप के कारण मृत्यु को
प्राप्त राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को सद्गति प्रदान करके सागर मिल गयी।
इसलिए इस स्थान को गंगा सागर संगम भी कहा जाता है। जहां प्राचीन काल में
कपिल मुनि का आश्रम था उस स्थान पर कपिल मुनि का एक मंदिर भी है। यहां की जमीन का
एक बड़ा हिस्सा चार साल में एक बार नज़र आता है अन्य दिनों में यह सागर में लीन
रहता है।