रावण के दस सिर
रावण लंका का राजा था। वह अपने दस सिरों के कारण भी जाना जाता था, जिसके कारण उसका नाम दशानन (दश = दस + आनन = मुख) भी था। परन्तु रावण के दस सिर नहीं थे किंतु वह दस सिर होने का भ्रम पैदा कर देता था इसी कारण लोग उसे दशानन कहते थे। जैन शास्त्रों में उल्लेख है कि रावण के गले में बड़ी-बड़ी गोलाकार नौ मणियां होती थीं। उक्त नौ मणियों में उसका सिर दिखाई देता था जिसके कारण उसके दस सिर होने का भ्रम होता था।
वाल्मीकि जी ने क्यों किया अनेक नामों का प्रयोग
रामायण में वाल्मीकिजी ने रावण के लिए अनेक शब्दों का प्रयोग किया है- जैसे रावण, लंकेश, लंकेश्वर, दशानन, दशग्रीव, शकंधर, राक्षससिंह, रक्षपति, राक्षसाधिपम्, राक्षसशार्दूलम्, राक्षसेन्द्र; राक्षसाधिकम्, राक्षसेश्वरः, लंकेश, लंकेश्वर। लेकिन कुछ गिने चुने स्थानों पर ही वाल्मीकी ने रावण के लिए दस-सिर सूचक दशानन, दशग्रीव या दशकंधर जैसे शब्दों का प्रयोग किया है। जहां वाल्मीकि जी ने इन शब्दों का प्रयोग किया है वहां पाते हैं कि रावण अपने प्रमुख 9 मंत्रियों से घिरा हुआ बैठा है। ऐसा भी कहा जाता है कि नवरत्न परंपरा रावण से ही शुरू होती है।
कौन थे रावण के मंत्री
रावण के दरबार में उनके नौ मंत्री थे जिन्हें उनके नवरत्न मान सकते हैं-
1.कुंभकर्ण (भाई),
2.विभीषण (भाई),
3.महापार्श्व (भाई),
4.महोदर (भाई),
5.इंद्रजित (बेटा),
6.अक्षयकुमार (बेटा),
7.माल्यवान (नाना का भाई),
8.विरूपाक्ष (माल्यवान का बेटा, रावण का सचिव),
9.प्रहस्त (मामा, प्रधान मंत्री)
एक अन्य स्थान पर भी वाल्मीकि जी ने वर्णन किया है कि जब रावण की घायल बहन शूर्पनखा रावण की राज्य सभा में जाती है, तो रावण मंत्रियों से घिरा बैठा था।
"उसके बीस भुजाएं और दस मस्तक थे।"
विंशद्भुजं दशग्रीवं दर्शनीयपरिच्छदम् (वा.रा।)
इसी तरह जब हनुमान को बंदी बनाकर रावण की मंत्री परिषद के सामने पेश किया जाता है, तब हनुमान देखते हैं कि रावण के दस सिर हैं-
शिरोभिर्दशभिर्वीरं भ्राजमानं महौजसम् (वा. रा. 5/49/6)।
किन्तु, यहीं वाल्मीकि जी एक बात का और वर्णन करते हैं कि जब लंका में रात को हनुमान जी सीता की खोज कर रहे थे तब हनुमान रावण के अन्तःपुर में घुसते हैं, और रावण को पहली बार देखते हैं, तो वहां स्पष्ट रूप में, बिना किसी भ्रम के, शयन कक्ष में सो रहे रावण का एक सिर और दो हाथ ही देखते हैं (वा. रा. 5/10/15)।...वाल्मीकि रामायण के आधार पर ऐसा जान पड़ता है कि रावण के दस सर प्रतीकात्मक रूप थे जिसे कभी मणियों और कभी उनके मंत्रियों से जोड़ दिया गया। अब दशानन वास्तव में दस सिर वाला था या फिर यह सिर्फ एक भ्रम यह वास्तव में शोधा का विषय है।