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Dussehra 2021: क्या वास्तव में रावण के थे दस सिर या था सिर्फ भ्रम

Fri, 15 Oct 2021 06:12 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला

सार

रावण मायावी इसलिए कहा जाता था कि वह इंद्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू जानता था। क्या आप जानते हैं हम दशानन के जिन दस सिर कि बात कर रहे हैं वह वास्तव में एक भ्रम था।
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रावण - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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रावण दहन के उपरान्त दशहरा का समापन हो जायेगा। और अगले वर्ष हम फिर रावण दहन का इंतज़ार करेंगे। रामकथा में रावण ऐसा पात्र है, जो राम के उज्ज्वल चरित्र को उभारने काम करता है। सारस्वत ब्राह्मण पुलस्त्य ऋषि का पौत्र और विश्रवा का पुत्र रावण एक परम शिव भक्त, उद्भट राजनीतिज्ञ , महापराक्रमी योद्धा , अत्यन्त बलशाली , शास्त्रों का प्रखर ज्ञाता ,प्रकान्ड विद्वान पंडित एवं महाज्ञानी था।  लंकेश “रावण” एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ तत्व ज्ञानी तथा बहु-विद्याओं का जानकार था। रावण मायावी इसलिए कहा जाता था कि वह इंद्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू जानता था। क्या आप जानते हैं हम दशानन के जिन दस सिर कि बात कर रहे हैं वह वास्तव में एक भ्रम था। 

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दशहरा 2021 - फोटो : Istock
रावण के दस सिर 

रावण लंका का राजा था। वह अपने दस सिरों के कारण भी जाना जाता था, जिसके कारण उसका नाम दशानन (दश = दस + आनन = मुख) भी था। परन्तु रावण के दस सिर नहीं थे किंतु वह दस सिर होने का भ्रम पैदा कर देता था इसी कारण लोग उसे दशानन कहते थे। जैन शास्त्रों में उल्लेख है कि रावण के गले में बड़ी-बड़ी गोलाकार नौ मणियां होती थीं। उक्त नौ मणियों में उसका सिर दिखाई देता था जिसके कारण उसके दस सिर होने का भ्रम होता था।

Ramayan
वाल्मीकि जी ने क्यों किया अनेक नामों का प्रयोग 

रामायण में वाल्मीकिजी ने रावण के लिए अनेक शब्दों का प्रयोग किया है- जैसे रावण, लंकेश, लंकेश्वर, दशानन, दशग्रीव, शकंधर, राक्षससिंह, रक्षपति, राक्षसाधिपम्, राक्षसशार्दूलम्, राक्षसेन्द्र; राक्षसाधिकम्, राक्षसेश्वरः, लंकेश, लंकेश्वर। लेकिन कुछ गिने चुने स्थानों पर ही वाल्मीकी ने रावण के लिए दस-सिर सूचक दशानन, दशग्रीव या दशकंधर जैसे शब्दों का प्रयोग किया है। जहां वाल्मीकि जी ने इन शब्दों का प्रयोग किया है वहां पाते हैं कि रावण अपने प्रमुख 9 मंत्रियों से घिरा हुआ बैठा है। ऐसा भी कहा जाता है कि नवरत्न  परंपरा रावण से ही शुरू होती है। 

dussehra 2021 - फोटो : dussehra 2021
कौन थे रावण के मंत्री 
 
रावण के दरबार में उनके नौ मंत्री थे जिन्हें उनके नवरत्न मान सकते हैं-  
1.कुंभकर्ण (भाई), 
2.विभीषण (भाई),
3.महापार्श्व (भाई), 
4.महोदर (भाई), 
5.इंद्रजित (बेटा), 
6.अक्षयकुमार (बेटा), 
7.माल्यवान (नाना का भाई), 
8.विरूपाक्ष (माल्यवान का बेटा, रावण का सचिव), 
9.प्रहस्त (मामा, प्रधान मंत्री)


 
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रामायण
एक अन्य स्थान पर भी वाल्मीकि जी ने वर्णन किया है कि जब रावण की घायल बहन शूर्पनखा रावण की राज्य सभा में जाती है, तो रावण मंत्रियों से घिरा बैठा था।
"उसके बीस भुजाएं और दस मस्तक थे।" 
विंशद्भुजं दशग्रीवं दर्शनीयपरिच्छदम् (वा.रा।) 

इसी तरह जब हनुमान को बंदी बनाकर रावण की मंत्री परिषद के सामने पेश किया जाता है, तब हनुमान देखते हैं कि रावण के दस सिर हैं-
शिरोभिर्दशभिर्वीरं भ्राजमानं महौजसम् (वा. रा. 5/49/6)। 

किन्तु, यहीं वाल्मीकि जी एक बात का और वर्णन करते हैं कि जब लंका में रात को हनुमान जी सीता की खोज कर रहे थे तब हनुमान रावण के अन्तःपुर में घुसते हैं, और रावण को पहली बार देखते हैं, तो वहां स्पष्ट रूप में, बिना किसी भ्रम के, शयन कक्ष में सो रहे रावण का एक सिर और दो हाथ ही देखते हैं (वा. रा. 5/10/15)।...वाल्मीकि रामायण के आधार पर ऐसा जान पड़ता है कि रावण के दस सर प्रतीकात्मक रूप थे जिसे कभी मणियों और कभी उनके मंत्रियों से जोड़ दिया गया। अब दशानन वास्तव में दस सिर वाला था या फिर यह सिर्फ एक भ्रम यह वास्तव में शोधा का विषय है।
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