कब है दशहरा-
पचांग के अनुसार इस वर्ष दशहरा का पर्व 15 अक्टूबर शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य कन्या राशि और चंद्रमा मकर राशि में होगा. इस दिन सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक श्रवण नक्षत्र रहेगा। जोकि बहुत शुभ माना जाता है इसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। विजय मुहुर्त दोपहर 1 बजकर 52 से 2 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।
दशहरा पूजा का महत्व-
दशहरा के दिन मां दुर्गा और भगवान राम की पूजा की जाती है। मां दुर्गा जहां शक्ति की प्रतीक हैं वहीं भगवान राम मर्यादा, धर्म और आदर्श व्यक्तित्व के प्रतीक हैं। जीवन में शक्ति, मर्यादा, धर्म और आदर्श का विशेष महत्व है। जिस व्यक्ति के भीतर ये गुण हैं वह सफलता को प्राप्त करता है।
विजय का सूचक है पान-
दशहरा के दिन रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद दहन के पश्चात पान का बीणा खाना सत्य की जीत की खुशी को व्यक्त करता है। इस दिन हनुमानजी को मीठी बूंदी का भोग लगाने बाद उन्हें पान अर्पित करके उनका आशीर्वाद लेने का महत्त्व है। विजयादशमी पर पान खाना, खिलाना मान-सम्मान, प्रेम एवं विजय का सूचक माना जाता है।
नीलकंठ के दर्शन है शुभ-
लंकापति रावण पर विजय पाने की कामना से मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने पहले नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे। नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का प्रतिनिधि माना गया है। दशहरा के दिन नीलकंठ के दर्शन और भगवान शिव से शुभफल की कामना करने से जीवन में भाग्योदय,धन-धान्य एवं सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।