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चाणक्य नीति: इन चार चीजों का जीवन में है सबसे ज्यादा महत्व

Sun, 30 Aug 2020 06:00 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियो में मनुष्य के लिए बहुत उपयोगी बातें बताई हैं। चाणक्य बहुत विद्वान थे। उन्हें हर विषय की गहरी समझ थी। उन्होंने नीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र आदि की रचना की। इन्हें कौटिल्य भी कहा जाता है।  इन्होंने तक्षशिला से शिक्षा प्राप्त की और वहीं पर शिक्षक भी हुए। आचार्य चाणक्य ने मनुष्य के को सफल बनाने कई महत्वपूर्ण बातों का वर्णन चाणक्य नीति में किया है। इतने पहले समय की इनकी नीतियां आज के जीवन में भी प्रासंगिक हैं। चाणक्य ने चार चीजों के बारे में जिक्र किया है, जिनका किसी भी मनुष्य के जीवन में सबसे ज्यादा महत्व है। आइए जानते हैं वे चार चीजें कौन-सी हैं।


 

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

नात्रोदक समं दानं न तिथि द्वादशी समा।
न गायत्र्या: परो मन्त्रो न मातुदैवतं परम्।।

इस श्लोक के अनुसार मनुष्य के लिए अन्न के दान को सबसे बड़ा दान बताया गया है। आचार्य  चाणक्य के अनुसार किसी भूखे व्यक्ति को खाना खिलाने और किसी प्यासे मनुष्य को पानी पिलाने से बड़ा कोई  और कोई दान नहीं हो सकता है। ऐसे लोग बहुत अच्छे हृदय के होते हैं। इस श्लोक में चाणक्य ने एकादशी तिथि के बाद की तिथि यानी द्वादशी को सबसे पवित्र बताया है। आचार्य चाणक्य के अनुसार यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। जो इस जगत के पालन कर्ता हैं। इसलिए इस तिथि का बहुत महत्व है।

 

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

इस श्लोक के अनुसार गायत्री मंत्र सबसे बड़ा मंत्र है। इस मंत्र का अर्थ होता है कि उस प्राणस्वरुप, दुखनाशक, सुखस्वरुप, तेजस्वी परमात्मा को हम अपनी अंतरआत्मा में धारण करें। परमात्मा हमें सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे। ऋषि मुनियों में भी इस  मंत्र को सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली बताया है।

 
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने कहा है कि मां का स्थान सबसे बड़ा होता है। मां को पृथ्वी से भी बड़ा माना गया है। चाणक्य के अनुसार मां से बड़ा कोई देवता या गुरु नहीं हो सकता। मां ही अपने बच्चे की सबसे पहली और बड़ी गुरु है।
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