लूटा हुआ माल बरामद करने के लिए पुलिस ने छापे मारने शुरू किए। लोग डर के मारे लूटा हुआ माल रात के अंधेरे में बाहर फेंकने लगे। कोई खेत में, तो कोई उन्हें कचरे के ढेर में फेंक रहा था। उन्हें यह आशंका थी कि कहीं पुलिस के हाथ कुछ लग गया, तो उनकी खैर नहीं। इन सबमें कुछ ऐसे लोग भी थे, जिन्होंने जमा किया हुआ पुराना माल भी मौका पाकर अपने घर से हटा दिया। ऐसे माल गैरकानूनी तिकड़म करके जमा किए गए थे।
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एक आदमी को इस तरह की होशियारी में बहुत कठिनाई आ रही थी। उसके पास चीनी की दो बोरियां थीं, जो उसने पंसारी की दुकान से लूटी थीं। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह इन बोरियों का क्या करे? काफी देर सोचने के बाद अंत में उसने उसे पास के कुएं में फेंकने की सोची।
एक बोरी तो वह जैसे-तैसे पुलिस से छिपते-छिपाते रात के अंधेरे में कुएं में फेंक आया, लेकिन जब दूसरी फेंकने के लिए जाने लगा, तो उसे बुरी तरह थकान होने लगी। थकान की वजह से चलना तक मुश्किल हो गया। फिर भी वह बोरी को करीब-करीब घसीटते हुए कुएं के पास ले गया। और जब कुएं में बोरी डाल रहा था कि अचानक खुद भी उसी कुएं में गिर गया। धम्म की आवाज सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। कुएं में रस्सियां डाली गईं।
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जवान नीचे उतरे और उस आदमी को बाहर निकाल लिया गया। उसे बहुत गंभीर चोटें आई थीं। जख्म की पीड़ा बर्दाश्त नहीं कर सकने की वजह से कुछ ही घंटों में उसकी मृत्यु हो गई। दूसरे दिन जब लोगों ने इस्तेमाल के लिए उस कुएं में से पानी निकाला, तो वह मीठा था। कहा जाने लगा कि यह उस व्यक्ति की ही करामात है। बस तभी से उस आदमी की कब्र पर दीए जलने की परंपरा शुरू हो गई।
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