पुनर्जन्म की बात को लेकर बहुत से लोगों में उलझन की स्थिति रहती है कि, क्या वास्तव में मरने के बाद जीव पुनः किसी शरीर में प्रवेश करता है।
लेकिन समय-समय पर कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं जो हैरान कर देती हैं और यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि मरने बाद फिर से किसी अन्य शरीर में जाना पड़ता है और अपने पूर्वजन्म के कर्मों के अनुसार फल भोगना पड़ता है।
यह जरुरी नहीं कि आप मनुष्य हैं तो मनुष्य योनी में ही जन्म लेंगे आप पशु-पक्षी कुछ भी हो सकते हैं। लेकिन पूर्वजन्म के संचित कर्मों के अनुसार पशु-पक्षी की योनी में जाने पर भी जीव को अपने पूर्वजन्म का ज्ञान होता है और उस जीवन में भी अपनी मुक्ति के लिए व्रत और पूजा करता है। यहां कुछ कुत्तों की बात की जा रही है जो नियमपूर्वक एकादशी और दूसरे व्रत किया करते। ऐसा माना जाता है कि यह कुत्ते पूर्वजन्म में योगी थे।
एकदशी व्रत रखने वाले इस कुत्ते की कहानी चौंका देगी
देहरादून में एक तपोवन आश्रम है। इसे श्रीगुरुमुखसिंहजी ने बनवाया है। इस तपोवन में एक कुत्ता रहता है जिसके बारे में यह कहा जाता है कि यह नियमपूर्वक सभी एकादशी का व्रत रखता है।
एकादशी के दिन अगर इस कुत्ते के आगे रोटी या कुछ भी खाने की चीजें डाली जाती हैं तो यह अपना मुंह घुमा लेता है या भोजन के पास से हट जाता है। यह कुत्ता मांस-मछली कुछ नहीं खाता।
लोगों को इस बात की हैरानी होती है कि इस कुत्ते को कैसे पता चल जाता है कि आज एकादशी है। लोगों ने कई बार जब इसे एकादशी व्रत करते हुए देखा तो उन्होंने अंदाजा लगाया कि यह पूर्वजन्म में मनुष्य रहा होगा और एकादशी व्रत करता रहा होगा। किसी पाप कर्म के कारण यह कुत्ता बना है।
एकादशी के दिन अगर इस कुत्ते को जबरन रोटी खिलाने का प्रयास किया जाता है तो रोटी उठाकर कहीं छिपा देता है और द्वादशी के दिन उस रोटी को खाकर अपना व्रत खोलता है।
सोमवारी व्रत रखने वाला कुत्ता
आर्यसंयासी श्रीस्वामी केवलानंद जी महाराज के आश्रम में एक कुत्ता था। इस कुत्ते की खूबी थी कि मंगलवार से रविवार तक जो भोजन मिलता खा लेता। लेकिन सोमवार के दिन इसे कुछ भी खिलाने की कोशिश करें यह भोजन नहीं करता।
स्वामी जी भी इस बात से आश्चर्यचकित थे कि इस कुत्ते को दिन का पता कैसे चल जाता है। एकादशी का व्रत रखने वाले कुत्ते की तरह यह भी सोमवार के दिन निराहार रहता। अगर कोई इसे भोजन करवाने का अधिक प्रयास करता तो भोजन लेकर कहीं छुपा आता था।
यह कुत्ता है हनुमान भक्त
आर्यसमाज के श्रीसुखदेवजी शास्त्री के बहन के घर में विवाह था। विवाह में इनके मामा जी के साथ उनका एक कुत्ता भी आया। मामा जी के साथ आए कुत्ते को लोगों ने गांव का कोई सामान्य कुत्ता समझकर डंडे से मारकर भगाना चाहा।
डंडे की चोट से कुत्ता चिल्लाने लगा। इतने में इनके मामा जी दौड़कर आए और बताने लगा यह क्या किया। इस कुत्ते को मत मारो यह बड़ा ही धर्मात्मा कुत्ता है। इन्होंने बताया कि यह कुत्ता आज पूरे दिन व्रत में है क्योंकि घर में कन्या का विवाह है। कन्यादान के बाद यह भोजन करेगा।
लोगों ने इस बात की सत्यता को जांचने के लिए कुत्ते के आगे भोजन रखा लेकिन कुत्ते ने भोजन को देखकर मुंह घुमा लिया। रात में जब कन्यादान हो गया तब इस कुत्ते ने भी भोजन किया।
श्रीसुखदेव जी के मामा जी ने यह भी बताया कि यह कुत्ता हनुमान जी का बड़ा भक्त है, हर मंगलवार को व्रत रखता है।
यह सभी कथाएं गीता प्रेस के 'परलोक और पुनर्जन्म' की सत्य घटनाएं नामक पुस्तक से संकलित हैं।