अंधेरा घिरा और महल में बत्तियां जगमगाने लगीं। दास-दासी सतर्क होकर काम करने लगे। कुछ उठे और आने वाले मेहमानों के इंतजार में मुख्य दरवाजे की ओर ताकने लगे। उन्हें मेहमानों की अगवानी के लिए खासतौर पर तैयार किया गया था। जो पोशाकें वे पहने हुए थे, उन पर जरी का काम हुआ था और कपड़ों पर सोने के बटन चमक रहे थे।
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मेहमान आने लगे। उनकी अगवानी महल के सामने बने बगीचे में की गई। उन्होंने बेशकीमती रत्नजड़ित पोशाकें पहन रखी थीं। मधुर संगीत की तान वातावरण में बिखरने लगी और आगंतुक उसकी धुन पर थिरकने लगे। आगंतुकों ने बिना किसी संकोच के तब तक मदिरा पान किया, जब तक वे निढाल नहीं होने लगे।
आधी रात के वक्त, दुर्लभ फूलों से सजी सुंदर मेजों पर अत्यंत स्वादिष्ट और सुगंधित पकवान परोसे गए। आगंतुकों ने भरपेट खाया। रात भर जश्न चलता रहा। सुबह होने पर मेहमान उसकी खूबियों और खामियों का जिक्र करते, इंतजामों पर चटखारे लेते जाने लगे। घर पहुंचने तक उन्हें अपना होश भी नहीं था।
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अब वाकया दूसरा है। बोझिल श्रम से थका एक आदमी अपने छोटे-से घर के बाहर जा खड़ा हुआ। उसने दरवाजे पर दस्तक दी। जैसे ही दरवाजा खुला, वह चहकता हुआ घरवालों से जा लिपटा। फिर वह अपने बच्चों के बीच बैठा, जो आग के चारों ओर बैठे थे।
इसी बीच उसकी पत्नी ने खाना बनाया और सजा दिया। सबने साथ बैठकर खाना खाया। खाना खाने के बाद वे लालटेन को घेरकर बैठ गए और दिन भर की घटनाओं पर बतियाने लगे। रात जब एक पहर बीत गई, तब सब चुपचाप खड़े हुए और रात्रि-देवता की स्तुति की। सुखी जीवन के लिए उन्होंने ईश्वर को धन्यवाद दिया।