एक नौजवान ने शहर के चौराहे पर ऐलान किया कि उसका दिल सबसे खूबसूरत है। उसके इर्द-गिर्द भीड़ जमा हो गई। सबने हामी भरी कि उसका दिल वाकई सबसे खूबसूरत है। पर तभी भीड़ में से एक बूढ़े की आवाज आई, नहीं बच्चे, मेरा दिल ज्यादा सुंदर है।
लोगों ने बूढ़े का दिल देखा। वह पूरे जोश से धड़क रहा था, लेकिन उस पर बहुत से जख्मों के निशान थे। कुछ टुकड़े निकले हुए थे, जिनकी जगह पर दूसरे टुकड़े कामचलाऊ तरीके से अटकाए हुए थे, जो देखने में भद्दे लग रहे थे। नौजवान ने बूढ़े का दिल देखा और हंस दिया। फिर उसने कहा कि मेरा दिल बेजोड़ है और तुम्हारा बहुत चोट खाया है।
बूढ़ा बोला, तुम्हारा दिल वाकई निर्दोष है। लेकिन मेरे दिल में लगा हर जख्म उस व्यक्ति की ओर इशारा करता है, जिसे मैंने अपने दिल का टुकड़ा दिया। उसके बदले में उसने भी मुझे अपने दिल का एक हिस्सा दिया, जिसे मैंने अपने दिल से जोड़ दिया। अक्सर ही ये टुकड़े ठीक से नहीं बैठे।
कभी मैंने किसी को दिल का एक टुकड़ा दिया, पर उसने मुझे कोई टुकड़ा नहीं दिया। वह जगह खाली रह गई। पर उम्मीद है कि जिन्हें चाहा था, वे आएंगे और और मेरे दिल के ये खाली कोने फिर से भर जाएंगे। क्या तुम्हें अब भी लगता है कि मेरा दिल बदसूरत है?
नौजवान से रहा न गया। उसने अपने दिल का एक टुकड़ा निकालकर बूढ़े के हाथ में रख दिया। बूढ़े ने उसे अपने दिल से लगा लिया और अपने भग्न हृदय से एक टुकड़ा निकालकर नौजवान को दिया। यह टुकड़ा तराशा हुआ नहीं था, इसलिए उसका दिल पहले जैसा नहीं रहा। नौजवान ने अपने दिल की तरफ देखा। बेशक वह पहले बेजोड़ नहीं था, पर उसे अब ज्यादा सुंदर नजर आने लगा।