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Yogini Ekadashi 2024: आज रखा जा रहा है योगिनी एकादशी का व्रत, जानें पूजा विधि और मुहूर्त

Tue, 02 Jul 2024 12:48 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Yogini Ekadashi 2024: साल में 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं। यह सभी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन उनकी पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती हैं। 
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Yogini Ekadashi 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Yogini Ekadashi 2024: साल में 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं। यह सभी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन उनकी पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती हैं। ऐसे में कुछ लोग निर्जला उपवास भी रखते हैं, जो बेहद कठिन होता है। इस दिन को लेकर मान्यता है कि जो भी एकादशी का व्रत रखता है, उसपर भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है। ऐसे में आषाढ़ माह में आने वाली योगिनी एकादशी का महत्व अधिक बढ़ जाता है।

आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार 2 जुलाई 2024 के दिन ये व्रत रखा जा रहा है। मान्यता है कि योगिनी एकादशी के दिन विष्णु जी की पूजा-अर्चना करने पर पापों से मुक्ति मिलती हैं। ये भी कहा जाता है कि इस व्रत को करने से मृत्यु के बाद भगवान विष्णु के चरणों में स्थान प्राप्त होता है। इस दिन व्रत रखने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर का फल प्राप्त होता है। ऐसे में आइए जानते हैं योगिनी एकादशी व्रत कब रखा जाएगा।

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कब है योगिनी एकादशी 2024 ?
2 जुलाई 2024 के दिन योगिनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन पूजा के लिए मुहूर्त सुबह 08.56 से दोपहर 02.10 तक रहने वाला है। वहीं योगिनी एकादशी का व्रत पारण 3 जुलाई सुबह 05.28 मिनट से सुबह 07.10 मिनट पर होगा।

एकादशी पूजा विधि 
योगिनी एकादशी के दिन विष्णु जी की पूजा का विधान है। साथ ही पीपल के वृक्ष की पूजा भी करनी चाहिए। इस दिन प्रातः काल उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद पीले रंग के वस्त्र धारण करना अधिक शुभ होता है। फिर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद उनकी विधि अनुसार पूजा करे और योगिनी एकादशी व्रत की कथा पढ़ें। बाद में विष्णु जी की आरती करें। इस दिन आप जरूरतमंद लोगों को भोजन व दान दक्षिणा भी दे सकती हैं, इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।

योगिनी एकादशी व्रत के नियम
  • योगिनी एकादशी व्रत के दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • एकादशी का व्रत नहीं रखने वालों को भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • इस दिन बाल, नाखून, और दाढ़ी कटवाने की भूल न करें।
  • योगिनी एकादशी के दिन ब्राह्मणों को कुछ दान अवश्य करना चाहिए।
  • एकादशी व्रत के पारण करने के बाद अन्न का दान करना शुभ माना गया है।
     
भगवान विष्णु की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

 जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
 
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
 
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
 
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
 
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
 
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
 
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
 
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
 
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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