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Vat Vrat 2024: आज रखा जाएगा वट पूर्णिमा व्रत, जानें तिथि पूजा विधि और मुहूर्त

Fri, 21 Jun 2024 11:03 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कब है ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा - फोटो : अमर उजाला
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Vat Vrat 2024: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह का खास महत्व है। इस दौरान आने वाले व्रत-त्योहार इस माह की महत्ता को बढ़ाते हैं। माना जाता है कि इस माह में पूजा-पाठ करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं। साथ ही मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु जी को प्रसन्न करने के लिए यह समय शुभ होता है। ज्येष्ठ माह में बड़ा मंगल, अपरा एकादशी, शनि जयंती और गंगा दशहरा जैसे बड़े पर्व मनाए जाते हैं। यह माह सुहागिन महिलाओं के लिए और भी खास होता है, क्योंकि इस माह में एक नहीं दो बार वट सावित्री व्रत रखा जाता है। इस दौरान एक व्रत कृष्ण पक्ष में और दूसरा व्रत शुक्ल पक्ष में रखा जाता है। इन दोनों व्रत के दिन वट वृक्ष की पूजा करने का विधान है, बिना इसके पूजा अधूरी मानी जाती है।

मान्यताओं के अनुसार इसमें त्रिदेवों -ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है, इसलिए पूजा करने पर इन तीनों देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूजा के दौरान हमेशा वृक्ष के नीचे सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। मान्यता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान के जीवन के लिए यमराज की पूजा बरगद पेड़ के नीचे की थी।

इस माह में पहला वट सावित्री व्रत 6 जून 2024 को रखा गया था। इस दौरान दूसरा वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रखा जाएगा। ऐसे में यह व्रत 21 जून 2024 को रखा जाएगा, इसे वट पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन कुछ खास पूजा मंत्र को जपने और विधिपूर्वक पूजा करने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। आइए इसके बारे में जान लेते हैं।

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कब है ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि 21 जून की सुबह 7 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 22 जून को प्रात: 6 बजकर 37 मिनट पर होगा। ऐसे में वट पूर्णिमा व्रत 21 जून को रखा जाएगा।

वट व्रत सामग्री की सूची
वट व्रत की पूजा में बरगद के पेड़ की पूजा का विधान है। अगर आपके आसपास बरगद का पेड़ नहीं है, तो कहीं से इसकी टहनी तोड़कर उसकी भी पूजा कर सकते हैं। इसके अलावा बांस का पंखा, कलावा या सफेद सूत (हल्दी में रंगा हुआ), मौसमी फल जैसे आम, लीची, तरबूज, अक्षत, केला का पत्ता, पान और तांबे का लोटा व मिठाई जैसी व्रत सामग्री पूजा में जरूर शामिल करें।

वट व्रत की पूजा विधि
वट व्रत के दिन महिलाएं सुबह ही स्नान कर लें। इसके बाद लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। बाद में मुहूर्त के अनुसार पूजा सामग्री के साथ पूजा स्थान पर पहुंचे। फिर वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और पुष्प, अक्षत, फूल, भीगा चना, गुड़ व मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद वट वृक्ष पर सूत लपेटते हुए सात बार परिक्रमा करें और अंत में प्रणाम करके परिक्रमा पूर्ण करें। बाद में आप हाथ में चने लेकर वट सावित्री की कथा पढ़ें या सुनें। अंत में अपनी इच्छानुसार दान करें।

वट वृक्ष पूजन मंत्र
अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते।।

यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा।।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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