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Eid-Al-Adha: 17 या 18 भारत में आखिर कब मनाई जाएगी बक़रीद ?

Tue, 18 Jun 2024 04:35 PM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Bakarid - फोटो : Amar Ujala
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Eid-Al-Adha 2024: ईद-अल-अज़हा, जिसे बकरीद के नाम से भी जाना जाता है, इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार हजरत इब्राहिम (अब्राहम) द्वारा अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने की इच्छा की याद में मनाया जाता है। भारत में, ईद-अल-अज़हा की तारीख इस्लामी चंद्र कैलेंडर, ज़ु अल-हज्जा के 10वें दिन पर निर्भर करती है। चूंकि बकरीद इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से मनाई जाती है, इसलिए हर साल ईद की तारीख थोड़ी अलग होती है। इस साल बकरीद की तारीख को लेकर बहुत से लोग के मन में असमंजस है कि बकरीद 16 को मनाएं या 17 को। इसलिए आइए इस लेख में जानते हैं कि देशभर में बकरीज का पर्व आखिर कब मनाया जा रहा है, साथ ही इसके महत्व के बारे में भी जानेंगे।

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2024 में ईद-अल-अज़हा की तारीख
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार 12वें महीने जु अल-हज्ज की 10वीं तारीख को बकरीद का पर्व मनाया जाता है। इस साल ज़ु अल-हज्जा महीना 30 दिनों का है। इसलिए भारत में बकरीद 17 जून को ही मनाई जाएगी।

ये भी पढ़ें- बकरीद पर क्यों दी जाती है बकरे की कुर्बानी? जानें क्या है पूरी कहानी (Kyo di jati hai bakare ki kurbani)
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ईद-अल-अज़हा का महत्व
ईद-अल-अज़हा का त्योहार त्याग, समर्पण और आस्था का प्रतीक है। इस त्योहार पर, मुस्लिम समुदाय के लोग बकरे की कुर्बानी देते हैं और उसके मांस को गरीबों और जरूरतमंदों में बांटते हैं। ईद-अल-अज़हा के दिन, लोग सुबह जल्दी उठकर नहाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और नमाज पढ़ते हैं। इसके बाद, वे कुर्बानी देते हैं और मांस को पकाते हैं। ईद-अल-अज़हा एक खुशी का त्योहार है और इसे परिवार और दोस्तों के साथ मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे को ईद की बधाई देते हैं, मिठाइयां खाते हैं और उपहार देते हैं।

तीन हिस्सों में बटता है बकरे का मांस
मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन अपनी हैसियत के अनुसार कुर्बानी देते हैं और जरूरतमंदों और गरीबों को मांस बांटते हैं। कुर्बानी का मांस तीन भागों में बांटा जाता है। एक भाग गरीबों और जरूरतमंदों को दिया जाता है, दूसरा भाग रिश्तेदारों और दोस्तों को दिया जाता है, और तीसरा भाग खुद रखा जाता है। ये त्योहार गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने और समाज में भाईचारे और सद्भावना को बढ़ावा देने की प्रेरणा देता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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