1. तुलसी के पौधे के समीप
तुलसी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। वैशाख पूर्णिमा की सायं तुलसी के पास दीपक लगाने से घर में धन, अन्न और सौभाग्य की वृद्धि होती है। यह दीपक शुद्ध घी या तिल के तेल का होना चाहिए। मान्यता है कि इससे पवित्रता और समृद्धि दोनों बनी रहती हैं।
2. मुख्य द्वार पर
घर का मुख्य द्वार सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की ऊर्जाओं के आने का मार्ग होता है। संध्या काल में द्वार के दोनों ओर दीपक लगाने से नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती। यह साधारण-सा उपाय वास्तु दोषों को भी शांत करता है और लक्ष्मी का प्रवेश सुनिश्चित करता है।
3. पीपल के वृक्ष के नीचे
पीपल वृक्ष को ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास स्थल माना गया है। वैशाख पूर्णिमा की सायं पीपल के नीचे दीपक लगाकर परिक्रमा करने से सभी पाप नष्ट होते हैं।
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4. कुएं, तालाब या किसी जल स्रोत के पास
जल स्रोतों के पास दीपक लगाना पितरों की तृप्ति का मार्ग बताया गया है। इससे पितृ दोष शांत होता है और कुल में सुख-शांति बनी रहती है। यह परंपरा गंगा स्नान और तर्पण के समान पुण्य देती है।
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5. घर के मंदिर या पूजाघर में
पूजाघर में भगवान विष्णु, लक्ष्मी, शिव या अपने आराध्य देवता के सामने दीपक लगाना विशेष फलदायी होता है। यह दीपक श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक होता है। इससे घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
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6. रसोईघर में दीपक
रसोईघर में दीपक जलाने की परंपरा माता अन्नपूर्णा को समर्पित मानी जाती है। इससे घर में अन्न की कभी कमी नहीं होती और लक्ष्मीजी की कृपा बनी रहती है। यह दीपक उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना शुभ होता है।
7. गौशाला या गाय के पास
गाय को पृथ्वी पर चलती हुई देवी कहा गया है। यदि संभव हो तो गौमाता के पास दीपक लगाकर उनकी आरती करें। इससे पापों का नाश होता है और संतान सुख की प्राप्ति होती है।