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Shardiya Navratri Day 7 : नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की इस आरती के साथ करें पूजा

Tue, 08 Oct 2024 06:25 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Maa Kalratri Aarti - फोटो : amar ujala
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Shardiya Navratri Day 7 Maa Kalratri Aarti: 3 अक्तूबर 2024 से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है,  इसका समापन 11 अक्तूबर 2024 को नवमी पर होगा। वहीं 12 अक्तूबर को दशहरा मनाया जाएगा। आश्विन माह के ये नौ दिन मां दुर्गा की पूजा को समर्पित है। इस दौरान माता रानी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिसमें सातवां रूप माता कालरात्रि का है। बता दें नवरात्रि के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है। उनकी आराधना से सभी बुरी शक्तियां दूर रहती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी दुर्गा के इस स्वरूप से सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं। ये भी कहा जाता है कि देवी दुर्गा ने असुर रक्तबीज का वध करने के लिए कालरात्रि को अपने तेज से उत्पन्न किया था। उनका वाहन गर्दभ यानी गधा है। कहते हैं कि जो साधक सच्चे भाव से देवी की पूजा अर्चना करता है माता कालरात्रि उसकी काल से रक्षा करती हैं। इस दौरान देवी की आराधना करने के लिए आप पूजा में इस आरती को शामिल कर सकते हैं। इससे माता प्रसन्न होंगी। आइए इसके बारे में जानते हैं।

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मां कालरात्रि का मंत्र

ॐ कालरात्र्यै नम:।

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि।
जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोस्तुते॥

ॐ ऐं सर्वाप्रशमनं त्रैलोक्यस्या अखिलेश्वरी।
एवमेव त्वथा कार्यस्मद् वैरिविनाशनम् नमो सें ऐं ॐ।।


मां कालरात्रि आरती

कालरात्रि जय-जय-महाकाली ।
काल के मुंह से बचाने वाली ॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा ।
महाचंडी तेरा अवतार ॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा ।
महाकाली है तेरा पसारा ॥

खडग खप्पर रखने वाली ।
दुष्टों का लहू चखने वाली ॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा ।
सब जगह देखूं तेरा नजारा ॥

सभी देवता सब नर-नारी ।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी ॥

रक्तदंता और अन्नपूर्णा ।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना ॥

ना कोई चिंता रहे बीमारी ।
ना कोई गम ना संकट भारी ॥

उस पर कभी कष्ट ना आवें ।
महाकाली मां जिसे बचाबे ॥

तू भी भक्त प्रेम से कह ।
कालरात्रि मां तेरी जय ॥


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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