रमजान का पाक महीना 7 मई से शुरू हो रहे हैं। रमजान के पूरे एक महीने खुदा की इबादत में बीतेगा। इस्लाम धर्म को मनाने वाले लोगों के लिए रमजान का महीना बहुत पवित्र होता है। रमजान के महीने में रोजा रखा जाता है जिसमें कई तरह के नियमों की पालन किया जाता है। आइए जानते हैं रमजान के महीनों में रोजे रखने का मतलब...
1- इस्लाम धर्म में अच्छा इंसान बनने के लिए पहले मुसलमान बनना आवश्यक है और मुसलमान बनने के लिए बुनियादी पांच कर्तव्यों का अमल में लाना आवश्यक है। पहला ईमान, दूसरा नमाज, तीसरा रोजा, चौथा हज और पांचवा जकात।
2- इस्लाम के ये पांचों कर्तव्य इंसान से प्रेम, सहानुभूति, सहायता तथा हमदर्दी की प्रेरणा देते हैं। रोजे को अरबी में सोम कहते हैं, जिसका मतलब है रुकना।
3- रोजा यानी तमाम बुराइयों से परहेज करना। रोजे में दिन भर भूखा व प्यासा ही रहा जाता है।
4- इसी तरह यदि किसी जगह लोग किसी की बुराई कर रहे हैं तो रोज़ेदार के लिए ऐसे स्थान पर खड़ा होना मना है।
5- जब मुसलमान रोज़ा रखता है, उसके हृदय में भूखे व्यक्ति के लिए हमदर्दी पैदा होती है।
6- रमजान में पुण्य के कामों का सबाव सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है।
7- जकात इसी महीने में अदा की जाती है।
8- रोजा झूठ, हिंसा, बुराई, रिश्वत तथा अन्य तमाम गलत कामों से बचने की प्रेरणा देता है। इसका अभ्यास यानी पूरे एक महीना कराया जाता है ताकि इंसान पूरे साल तमाम बुराइयों से बचे।
9- कुरान में अल्लाह ने फरमाया कि रोजा तुम्हारे ऊपर इसलिए फर्ज किया है, ताकि तुम खुदा से डरने वाले बनो और खुदा से डरने का मतलब यह है कि इंसान अपने अंदर विनम्रता तथा कोमलता पैदा करे?