हिंदू धर्म में प्रत्येक शुभ काम को करने के लिए शुभ मुहुर्त, तिथि और समय का विशेष ध्यान दिया जाता है। लेकिन साल में कुछ तिथियां ऐसी आती हैं जिसमें किसी भी शुभ कार्य को करने में मुहूर्त नहीं देखा जाता। वैशाख मास की अक्षय तृतीया इनमें से एक है। इस बार अक्षय तृतीया 7 मई को मनाई जाएगी। जानते हैं अक्षय तृतीया का महत्व।
अक्षय तृतीया की 10 बातें
1- अक्षय तृतीया को अबूझ मूहूर्त कहा जाता है अबूझ मूहूर्त इसलिए क्योंकि इस तिथि में किसी भी शुभ कार्य के लिए शुभ मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती है।
2- अगर विवाह के लिए कोई भी शुभ मुहूर्त की तिथि नहीं मिल पाती है तो अक्षय तृतीया पर विवाह कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। अक्षय तृतीया पर सभी तरह के शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।
3- अक्षय तृतीया के दिन ही चार धाम में एक भगवान बद्रीनाथ के भी पट खुलते हैं।
4 अक्षय तृतीया के शुभ दिन पर ही वृंदावन स्थित विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में साल में एक दिन बिहारी जी के चरणों के दर्शन होते हैं। अक्षय तृतीया पर भगवान बांके बिहारी के पूरे शरीर पर चंदन का लेप किया जाता है। इसके लिए दक्षिण भारत से चंदन मंगाया जाता है और उसे महीनों पहले घिसना शुरू कर दिया जाता है।
5-अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम जयंती मनाई जाती है। भगवान परशुराम विष्णु के छठे अवतार हैं।
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6- शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया को त्रेतायुग का आरम्भ माना गया है। इस दिन पर किया गया जप,तप, ज्ञान और दान अक्षय फलदायक होता है।
7- अक्षय तृतीया पर नर-नारायण ने अवतार लिया था इसलिए इस दिन का विशेष महत्व होता है।
8- हयग्रीव की अवतार भी अक्षय तृतीया के दिन हुआ था इसलिए इसका विशेश महत्व माना गया है।
9- इस दिन गंगा स्नान और दान का महत्व होता है। दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
10- अक्षय तृतीया पर किया गया कोई भी कार्य का क्षय नहीं होता। अक्षय का अर्थ है कभी ना क्षय होना। अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है।