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Navratri 2024: नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी के दिन क्यों करते हैं कन्या पूजन ? जानिए धार्मिक महत्व

Sun, 06 Oct 2024 02:02 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Navratri 2024 Kanya Pujan Vidhi: धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में कन्या पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। 'मार्कण्डेय पुराण' के अनुसार, अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन करने से मनुष्य के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे देवी दुर्गा की असीम कृपा प्राप्त होती है।
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नवरात्रि में कन्या पूजन का महत्व - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Navratri 2024 Kanya Pujan Vidhi: नवरात्रि हिन्दू धर्म का एक प्रमुख पर्व है जिसमें नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस पर्व का विशेष महत्त्व देवी शक्ति की आराधना से जुड़ा हुआ है, और इसका समापन अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ होता है। कन्या पूजन का धार्मिक, सांस्कृतिक और शास्त्रीय महत्व बहुत गहरा है, जिसे शास्त्रों में भी उल्लेखित किया गया है।
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कन्या पूजन का धार्मिक महत्त्व
कन्या पूजन नवरात्रि के समापन पर देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीकात्मक पूजन होता है। इसमें छोटी लड़कियों को देवी के स्वरूप में देखा जाता है और उन्हें भोजन कराकर, वस्त्र आदि भेंट कर सम्मानित किया जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि नारी शक्ति की आराधना देवी दुर्गा की आराधना के समान है। विशेषकर अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन करने से व्यक्ति को मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

कन्या पूजन की शास्त्रीय मान्यता
धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में कन्या पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। 'मार्कण्डेय पुराण' के अनुसार, अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन करने से मनुष्य के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे देवी दुर्गा की असीम कृपा प्राप्त होती है। 'देवी भागवत' में भी कन्या पूजन की महिमा का वर्णन किया गया है, जहां बताया गया है कि कन्या को देवी के रूप में पूजने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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कन्या पूजन की विधि
कन्या पूजन के लिए कुल 2 से 10 साल की नौ कन्याओं का पूजन किया जाता है। इन कन्याओं को नौ देवियों का प्रतीक माना जाता है। पहले कन्याओं को सम्मानपूर्वक आसन पर बैठाया जाता है और उनके पैरों को धोया जाता है। इसके बाद उन्हें चंदन, कुमकुम, और पुष्प से पूजित किया जाता है। भोजन में उन्हें पूरी, हलवा, चना और अन्य विशेष पकवान दिए जाते हैं। पूजा के बाद कन्याओं को वस्त्र, आभूषण या धन देकर विदा किया जाता है।

कन्या पूजन का आध्यात्मिक पक्ष
कन्या पूजन के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक संदेश भी छिपा है। यह पूजा स्त्री शक्ति के सम्मान और आराधना का प्रतीक है। नवरात्रि के समय देवी दुर्गा की पूजा के साथ-साथ नारी जाति का भी पूजन करना यह दर्शाता है कि स्त्री शक्ति ही जीवन की सृजनकर्ता और पालनकर्ता है। कन्या पूजन से यह संदेश मिलता है कि समाज में महिलाओं का स्थान सर्वोपरि है और उनका सम्मान करना अत्यावश्यक है।

कन्या पूजन से मिलने वाले लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और साधक को धन, समृद्धि, और संतान सुख की प्राप्ति होती है। यह पूजा न केवल आर्थिक उन्नति, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करती है। इसके अलावा, कन्या पूजन करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि आती है। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रिके दौरान किए गए कन्या पूजन से घर में सुख-शांति का वास होता है और घर के समस्त वास्तु दोषों का निवारण होता है।
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