नवरात्रि में अष्टमी तिथि महत्व-
प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाअष्टमी का व्रत किया जाता है लेकिन नवरात्रि में पड़ने वाली अष्टमी तिथि का विशेष महत्व माना जात है। इसे महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां आदिशक्ति के अष्टम स्वरुप देवी महगौरी का पूजन किया जाता है। इसी के साथ अष्टमी तिथि पर व्रती अपने घरों में हवन भी करवाते हैं। यह तिथि परम कल्याणकारी और यश-कीर्ति व समृद्धि दिलाने वाली मानी गई है। नवरात्रि में मां दुर्गा की विधिवत पूजा करने से सभी कष्टों का नाश होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। इसके साथ ही अष्टमी तिथि पर शस्त्र पूजन भी किया जाता है। ज्योतिष में भी अष्टमी तिथि को जया तिथि कहा गया है। माना जाता है कि इस तिथि में किए गए कार्य सदैव पूर्ण होते हैं। यह तिथि व्याधियों का नाश करने वाली मानी गई है।
दुर्गा अष्टमी तिथि व शुभ मुहूर्त-
इस बार दुर्गा अष्टमी का पूजन 13 अक्टूबर 2021 दिन बुधवार को किया जाएगा।
शारदीय नवरात्रि अष्टमी तिथि आरंभ- 12 अक्टूबर 2021 को रात 09 बजकर 47 मिनट से
शारदीय नवरात्रि अष्टमी तिथि समाप्त- 13 अक्टूबर 2021 को रात 08 बजकर 07 मिनट पर
नवरात्रि में नवमी तिथि कन्या पूजन का महत्व-
नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी तिथि को समस्त सिद्धि प्रदान करने वाली मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। अष्टमी तिथि की तरह ही नवरात्रि में नवमी तिथि का भी विशेष महत्व माना गया है। इस दिन मां दुर्गा के नौं स्वरुप की प्रतीक नौं कन्याओं के अपने घर आमंत्रित करके पूजन किया जाता है। इसके साथ ही इस दिन एक बालक को भी आमंत्रित किया जाता है जिसे बटुक भैरव या लांगूर का स्वरुप माना जाता है। कन्या पूजन के साथ ही मां दुर्गा को विदा कर दिया जाता है और नवरात्रि का समापन हो जाता है।
नवमी तिथि व शुभ मुहूर्त-
इस बार शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि का पूजन 14 अक्टूबर 2021 दिन गुरुवार को किया जाएगा और इसी के साथ नवरात्रि का समापन हो जाएगा।
नवमी तिथि आरंभ-13 अक्टूबर 2021 दिन बुधवार रात्रि 08 बजकर 07 मिनट से
नवमी तिथि समाप्ति-14 अक्टूबर 2021 दिन गुरुवार शाम 06 बजकर 52 मिनट पर
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