मेष राशि
मेष राशि का स्वामी ग्रह मंगल ग्रह है। ऐसे में मेष राशि के जातकों भगवान गणेश की लाल रंग की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए।
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातक को भगवान गणेश की सफेद रंग की एकदंत प्रतिमा लानी चाहिए।
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों को हल्के हरे रंग में लंबोदर की मूर्ति की स्थापना करनी चाहिए।
कर्क राशि
कर्क राशि के स्वामी ग्रह चंद्रमा है। इसीलिए कर्क राशि के जातकों को सफेद रंग के मूषक वाहन के साथ गणेश प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए।
- घी का दीपक जलाएं और भगवान गणेश को गेंदे का फूल व गुड़ का भोग लगाएं इस उपाय से शुभ फलों की प्राप्ति होगी।
- भगवान गणेश को हरा रंग बेहद ही प्रिय होता है ऐसे में गणेश चतुर्थी के पूजन पर उन्हें साफ हरे रंग का वस्त्र पहनाएं। वही उनकी प्रतिमा के नीचे पीले रंग का कपड़ा बिछा दें। इस उपाय से समस्याओं का हल जल्दी निकलेगा।
- भाग्योदय के लिए श्री गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के मस्तक पर चंदन, सिंदूर व अक्षत का तिलक जरूर करें।
- श्री गणेश चतुर्थी के दिन गाय को हरा चारा खिलाने से ग्रह दोष खत्म हो जाते हैं।
- आर्थिक स्थिति बेहतर करने के लिए श्री गणेश चतुर्थी के दिन पांच दूर्वा में ग्यारह गांठें लगा कर इसे किसी लाल कपड़े में बांध दे और फिर भगवान गणेश के सामने रख दें।
- व्यवसाय में उन्नति के लिए श्री गणेश चतुर्थी के दिन हरे मूंग का दान करें। इसे करने से बुध देवता प्रसन्न होते हैं। बुध देवता किसी भी जातक की कुंडली में व्यापार और संचार के कारक माने गए हैं।
गणेश चतुर्थी पर भगवान गजानन के अनेकों नामों के जाप से मिलता है सुख-समृद्धि और वैभव
कलाकार सुदर्शन पटनायक ने रेत की भगवान गणपति की मूर्ति बनाकर देशवासियों को गणेशोत्सव की शुभकामनाएं दीं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश की पूजा उपासना करने से कार्यों में आने वाली सभी तरह बाधाएं खत्म हो जाती हैं। भगवान गणपति के प्रसन्न होने पर व्यक्ति को सिद्धि, सफलता, यश, मान-सम्मान और सुख-समृद्धि प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान गणेश की कुछ राशियों के ऊपर विशेष कृपा रहती हैं।
भगवान गणेश को दूर्वा बहुत ही प्रिय होती है। दूर्वा एक घास होती है जो हर जगह आसानी के साथ मिल जाती है। इसे दूब भी कहा जाता है। दरअसल भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने के पीछे एक कथा है। अनलासुर राक्षस से सभी देवी-देवता परेशान हो गए थे। तब भगवान गणेश ने सभी देवी-देवताओं और मुनियों की रक्षा के लिए इस अनलासुर को निगल लिया था। राक्षस को निगल लेने की वजह से उनके पेट में बहुत ही जलन होने लगी। तब उनकी जलन को शांत करने के लिए मुनि कश्यप ने उन्हें खाने के लिए दू्र्वा की गांठे दी। दूर्वा खाते ही फौरन भगवान गणेश के पेट की जलन समाप्त हो गई। तभी से भगवान गणपति की पूजा में दूर्वा चढ़ाई जाती है।
अब बस थोड़ी ही देर बाद भगवान गणेश की स्थापना और पूजा के लिए सबसे अच्छा मुहू्र्त आने वाला है। इस शुभ मुहूर्त में करें गणपति की स्थापना,पूजा और पाएं भगवान सिद्धिदाता से सुख-समृद्धि
गणेश स्थापना शुभ मुहू्र्त
पहला मुहूर्त: प्रात: 6:05 से 9:27 बजे तक
दूसरा मुहूर्त: प्रातः 10:30 से दोपहर 2:00 बजे तक
तृतीय मुहूर्त: दोपहर 3:30 से सायं 5 बजे तक
चतुर्थ मुहूर्त: सायं 6:00 से सेन 7:00 बजे तक
मध्याह्न काल मुहूर्त: प्रातः 11:20 से दोपहर 1:20 तक
अच्छा मुहूर्त- सुबह 11.20 से दोपहर 1.20 तक
सभी देवी-देवताओं में गणेशजी को बहुत अधिक कुशाग्र बुद्धि वाला माना गया है। गजाननजी की लम्बी सूंड महाबुद्धित्व का प्रतीक है लम्बी सूंड तीव्र सूंधने की क्षमता होती है। जिसका अर्थ है कि जो समझदार व्यक्ति है वह अपने आसपास के माहौल को पहले से ही सूंघ सकता है। गणेश जी की सूंड हमेशा हिलती-डुलती रहती है, जिसका तात्पर्य है कि मनुष्य को हमेशा सचेत रहना चाहिए।
आज देशभर में गणेशोत्सव की धूम है। भगवान गणेश के भक्त अपने घरों और सार्वजनिक जगहों पर गणेशजी की भव्य प्रतिमाएं स्थापित करके विधि-विधान से पूजा कर रहै हैं। गणेशोत्सव का पर्व 9 सितंबर तक चलेगा। ऐसे आने वाले 10 दिनों में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हुए भगवान गणपति से जीवन में सुख-समृद्धि और संपन्नता का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
इस गणेशोत्सव पर कैसे करनी चाहिए भगवान गणेश की उपासना यहां पढ़ें पूरी पूजा विधि- (गणेश पूजा विधि)
आज बप्पा घर-घर में विराजमान होंगे। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस तिथि पर भगवान गणेश के भक्त अपने घरों और प्रतिष्ठानों में गणपति की मूर्ति की स्थापना करते हैं और अंनत चतुर्दशी पर उनका विसर्जन करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं भगवान गणेश की स्थापना और विसर्जन क्यों करते हैं।
जानने के लिए यहां क्लिक करें- गणेश स्थापना और विसर्जन क्यों?
किसी भी शुभ कार्य जैसे धार्मिक और मांगलिक अनुष्ठान करने से पहले सबसे भगवान गणेश की पूजा अवश्य की जाती है। भगवान गणेश को मंगलकर्ता और विध्नहर्ता कहा जाता है। भगवान गणेश की पूजा और उनके बारे में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। जैसे-
- सबसे पहले गणपति पूजन क्यों आवश्यक होता है?
- गणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाते हैं?
- भगवान गणेश को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते हैं?
- भगवान गणेश को क्यों है सिद्धिदाता
- गणपति जी को मोदक क्यों पसंद हैं?
- गणेश जी का विशाल शरीरे लेकिन उनका वाहन छोटा चूहा क्यों?
- गणेश जी का एक दांत टूटा क्यों है?
इन सभी सवालों का यहां पाएं जवाब- (यहां पढ़े पूरी कहानी)
आज गजानन,विध्ननहर्ता और सिद्धि प्रदान करने वाले भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। गणेश ज्ञान और बुद्धि के ऐसे देवता हैं,जिनकी उपासना से जीवन में सुख-समृद्धि,सफलता,मान-सम्मान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। आज से घरों और पंडालों में गणपति विराजमान होंगे। घर की किस तरह से गणपति की स्थापना की जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा शुभ फल की प्राप्ति हो सके इसे जानने के लिए..... (यहां पढ़ें पूरी खबर)
आज से भगवान गणेश की उपासना और साधना का महापर्व गणेशोत्सव प्रारंभ हो गया है। यह 09 सितंबर तक चलेगा। इस बार की भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की गणेश चतुर्थी बहुत ही खास और शुभ फल देने वाली है। 300 साल बाद गणेश चतुर्थी पर दुर्लभ संयोग बना रहा है। दरअसल इस बार गणेश चतुर्थी तिथि पर वही शुभ योग और संयोग बना हुआ है जो गणेशजी के जन्म के समय बना था। भगवान गणेश का जन्म बुधवार के दिन, चतुर्थी तिथि, चित्रा नक्षत्र और मध्याह्र काल में हुआ था। इसके अलावा 31 अगस्त से 9 सितंबर तक गणेश उत्सव के बीच कई शुभ और मंगलकारी शुभ योग बनेगा।
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- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश की पूजा में तुलसी नहीं अर्पित करनी चाहिए।
- गणपति की पूजा में शंख से जल कभी नहीं चढ़ाना चाहिए।
- भगवान गणपति की पूजा बिना दूर्वा घास और मोदक के अधूरी मानी जाती है।
- भगवान गणेश के प्रिय फूल हैं- गेंदा, गुलाब, कनेर, चंपा, शमी, दूर्वा, धतूरा और बिल्व पत्र
- भगवान गणेश की पूजा के दौरान कभी काले रंग के वस्त्र नहीं पहनना चाहिए।
- जब भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना हो जाए तो कभी इसे एक जगह से दूसरी जगह नहीं करना चाहिए।
आज गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने से पहले गणपति के मंत्र बोलें
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थ- घुमावदार सूंड वाले,विशालकाय शरीर,करोड़ों सूर्य के समान कीर्ति और तेज वाले, मेरे भगवान गणेश हमेशा मेरे सारे कार्य बिना बाधा के पूरे करें।
एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्ं।
विघ्नशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥
अर्थ- जिनके एक दांत और सुंदर मुख है, जो शरण में आए भक्तों की रक्षा और प्रणतजनों की पीड़ा को नाश करने वाले हैं, उन शुद्ध स्वरूप आप गणपित को कई बार प्रणाम है।
गजाननाय पूर्णाय साङ्ख्यरूपमयाय ते ।
विदेहेन च सर्वत्र संस्थिताय नमो नमः ॥
अर्थ- हे गणेश्वर ! आप गज के समान मुख धारण करने वाले, पूर्ण परमात्मा और ज्ञानस्वरूप हैं । आप निराकार रूप से सर्वत्र विद्यमान हैं, आपको बारम्बार नमस्कार है ।
दांयी ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेशजी हठी होते हैं आमतौर पर ऐसी प्रतिमा घर और ऑफिस में नहीं रखी जाती। इनको स्थापित करने पर कई धार्मिक रीतियों का पालन करना ज़रूरी होता है। ऐसी प्रतिमा को देवालयों में स्थापित करके वहीं उनकी पूजा की जाती है । ऐसे गणेशजी का पूजन विघ्न-विनाश, शत्रु पराजय, विजय प्राप्ति, उग्र तथा शक्ति प्रदर्शन जैसे कार्यों के लिए फलदायी माना जाता है। दायीं ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेशजी सिद्धिविनायक कहलाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इनके दर्शन से हर कार्य सिद्ध हो जाता है। किसी भी विशेष कार्य के लिए कहीं जाते समय यदि इनके दर्शन करें तो वह कार्य सफल होता है व शुभ फल प्राप्त होता है।
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आज गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना और पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त है। सबसे अच्छा शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 20 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 20 मिनट का है। दोपहर में भगवान गणेश की पूजा और उपासना के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ समय होता है। इसलिए दोपहर के समय ही गणेश मूर्ति की स्थापना और पूजा करनी चाहिए। अगर किसी कारण से ऐसे संभव न हो तो दिन के शुभ लग्न और चौघड़िया मुहू्र्त में भगवान गणेश की स्थापना कर सकते हैं।
Ganesh Chaturthi 2022 Muhurat Time Puja Vidhi, Wishes In Hindi: आज भाद्रपद चतुर्थी तिथि है और आज से गणेशोत्सव प्रारंभ हो चुका है। सिद्धिदाता, विध्नहर्ता, मंगलमूर्ति, सफलता,संपन्नता,सुख और शांति के सूत्रधार प्रथम पूजनीय भगवान गणपति की स्थापना के साथ पूजा-अर्चना शुरू हो गई। आज शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाएगी।