आज, मंगलवार 20 अक्तूबर को देशभर में विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है। हिंद धर्म में विजयादशमी के पर्व का विशेष महत्व होता है। इस दिन देशभर में रामलीलाओं का मंचन किया जाता है और शाम को भगवान राम और रावण के बीच हुए युद्ध का मंचन करते हुए रावण का वध होता है। इसके बाद रावण के पुतले बनाकर दहन किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक मान्यतओं के अनुसार, इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया और अधर्म पर धर्म की जीत हुई थी। जिसके चलते देशभर में रावण दहन के साथ शस्त्र पूजा होती है। दशहरा पर भगवान राम की विधि-विधान से साथ पूजा होती है जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और मंगलकामना होती है। दशहरा पर भगवान राम की पूजा के साथ अंत में आरती जरूर करें। आइए जानते हैं दशहर पर श्रीराम जी की आरती...
श्री राम चंद्र जी की आरती |
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।
मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।
एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।
दोहा- जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।
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