धनतेरस हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह पर्व आज यानी 10 नवंबर, दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। सनातन धर्म में धनतेरस के दिन खरीदारी करना और देवताओं की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। धनतेरस या धनत्रयोदशी से ही दीपावली का 5 दिन का महापर्व आरंभ हो जाता है। धनतेरस के दिन भगवान गणेश, देवी लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर, औषधि के देवता धन्वंतरि और यमराज की पूजा की जाती है।
भगवान गणेश पूजा विधि
श्री गणेश देवताओं में सर्वप्रथम पूजे जाते हैं, इसीलिए सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। सर्वप्रथम श्री गणेश को स्नान कराएं। इसके उपरांत विघ्नहर्ता श्री गणेश को चंदन या कुमकुम का तिलक लगाएं और पुष्प अर्पित करें। पूजा शुरू करने से पूर्व नीचे दिए गए मंत्र का जाप अवश्य करें।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
भगवान धन्वंतरि की पूजाविधि
धनतेरस के दिन प्रदोष काल में धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। आरोग्य की उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा में भगवान धन्वंतरि की आराधना करने से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। दीपक रखने से पूर्व खील या चावल रखकर उसके ऊपर दीपक जलाएं। अब एक कलश में शुद्ध जल लेकर सभी देवताओं को आचमन कराएं और फिर रोली, कुमकुम, हल्दी, गंध, अक्षत, पान, पुष्प, नैवेद्य या मिष्ठान,फल,दक्षिणा आदि उन्हें अर्पित कर प्रणाम करें और अपने रोगों के नाश की कामना करें। परिवार में दीर्घायु और आरोग्यता बनी रहे इसके लिए पूजा के दौरान 'ॐ नमो भगवते धन्वंतराय विष्णुरूपाय नमो नमः' मंत्र का उच्चारण करते रहें।
आयुर्वेद के अनुसार भी धर्म,अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति स्वस्थ शरीर और दीर्घायु से ही संभव है। शास्त्र भी कहते हैं कि 'शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम्' अर्थात-धर्म का साधन भी निरोगी शरीर ही है, तभी आरोग्य रुपी धन के लिए ही भगवान धन्वंतरि की पूजा आराधना की जाती है। माना जाता है कि इस दिन धन्वंतरि की पूजा मनुष्य को वर्षपर्यंत निरोगी रखती है।
लक्ष्मी पूजन विधि
महालक्ष्मी का पूजन धनतेरस के दिन प्रदोष काल में ही किया जाता है। जिस चौकी पर गणेशजी विराजमान हैं वहीं मां की मूर्ति या तस्वीर रख लें। इसके बाद कलश में गंगाजल रखें। इसके साथ ही सुपारी, फूल, एक सिक्का और कुछ चावल के दाने और अनाज भी इस कलश के ऊपर रखें। इसके बाद लक्ष्मी जी की प्रतिमा का पंचामृत (दूध, दही, घी, मक्खन और शहद का मिश्रण) से स्नान कराएं। फिर जल से स्नान कराकर माता लक्ष्मी को चंदन लगाएं, इत्र, सिंदूर, हल्दी, गुलाल आदि अर्पित करें। माता की आरती करते हुए सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। फिर मंत्र का जाप करें।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥
कुबेर पूजा विधि
धन के देवता कुबेर को आसुरी शक्तियों का हरण करने वाला देवता भी माना गया है। इस दिन सांयकाल में उत्तर दिशा में कुबेर यंत्र को स्थापित कर उन पर गंगाजल छिड़क कर रोली,चावल से तिलक करें, पुष्प चढ़ाएं और दीप जलाकर भोग लगाएं और इस मंत्र का जाप करें। इसके पश्चात कुबेर जी की आरती और प्रणाम करके अपनी सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये।
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
यमराज पूजा विधि
वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी गई है। धनतेरस के दिन प्रदोष काल में घर के मुख्य दरवाजे पर यमदेव का स्मरण करके दक्षिणमुख होकर अन्न की ढेरी पर तेल का चारमुखी दीपक स्थापित करना चाहिए। चूंकि यह दीपक मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त जलाया जाता है, इसलिए दीप जलाते समय पूर्ण श्रद्धा से उन्हें प्रणाम कर प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार पर अपनी दया दृष्टि बनाए रखें और किसी की अकाल मृत्यु न हो।