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Dev Uthani Ekadashi Narayana Stotra Path 2023: देवउठनी एकादशी 23 नवंबर को, करें भगवान विष्णु स्तोत्र का पाठ

Tue, 21 Nov 2023 12:56 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

देव उठनी एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और आशीर्वाद मांगते हैं।
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Dev Uthani Ekadashi Narayana Stotra Path 2023 - फोटो : istock
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विस्तार
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Dev Uthani Ekadashi Narayana Stotra Path 2023: देवउठनी एकादशी का बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु चार महीने के अंतराल के बाद कार्तिक मास की एकादशी को जागते हैं। देव उठनी एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और आशीर्वाद मांगते हैं। इस वर्ष, प्रबोधिनी एकादशी या देवउठनी एकादशी व्रत 23 नवंबर, 2023 को मनाया जाएगा। देवउठनी एकादशी के दिन विष्णु  स्तोत्र का पाठ जरूर करें। इससे भगवान विष्णु की कृपा हमेशा आपके ऊपर बनी रहेगी और शुभ फलों की भी प्राप्ति हो सकती है। 

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विष्णु स्तुति और नारायण स्तोत्र से करें श्री हरि विष्णु को प्रसन्न 

देव उठनी एकादशी के दिन श्री हरि विष्णु की स्तुति और नारायण स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु  भी प्रसन्न होते हैं। 


श्री नारायण स्तोत्र

नारायण नारायण जय गोपाल हरे॥
करुणापारावारा वरुणालयगम्भीरा ॥
घननीरदसंकाशा कृतकलिकल्मषनाशा॥
यमुनातीरविहारा धृतकौस्तुभमणिहारा ॥

पीताम्बरपरिधाना सुरकल्याणनिधाना॥
मंजुलगुंजा गुं भूषा मायामानुषवेषा॥
राधाऽधरमधुरसिका रजनीकरकुलतिलका॥
मुरलीगानविनोदा वेदस्तुतभूपादा॥

बर्हिनिवर्हापीडा नटनाटकफणिक्रीडा॥
वारिजभूषाभरणा राजिवरुक्मिणिरमणा॥
जलरुहदलनिभनेत्रा जगदारम्भकसूत्रा॥
पातकरजनीसंहर करुणालय मामुद्धर॥

अधबकक्षयकंसारेकेशव कृष्ण मुरारे॥
हाटकनिभपीताम्बर अभयंकुरु मेमावर॥
दशरथराजकुमारा दानवमदस्रंहारा॥
गोवर्धनगिरिरमणा गोपीमानसहरणा॥

शरयूतीरविहारासज्जनऋषिमन्दारा॥
विश्वामित्रमखत्रा विविधपरासुचरित्रा॥
ध्वजवज्रांकुशपादा धरणीसुतस्रहमोदा॥
जनकसुताप्रतिपाला जय जय संसृतिलीला॥

दशरथवाग्घृतिभारा दण्डकवनसंचारा॥
मुष्टिकचाणूरसंहारा मुनिमानसविहारा॥
वालिविनिग्रहशौर्यावरसुग्रीवहितार्या॥
मां मुरलीकर धीवर पालय पालय श्रीधर॥

जलनिधिबन्धनधीरा रावणकण्ठविदारा॥
ताटीमददलनाढ्या नटगुणगु विविधधनाढ्या॥
गौतमपत्नीपूजन करुणाघनावलोकन॥
स्रम्भ्रमसीताहारा साकेतपुरविहारा॥

अचलोद्घृतिद्घृञ्चत्कर भक्तानुग्रहतत्पर॥
नैगमगानविनोदा रक्षःसुतप्रह्लादा॥
भारतियतिवरशंकर नामामृतमखिलान्तर॥
 

विष्णु स्तुति
शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्,
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्,
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।

यं ब्रह्मा वरुणैन्द्रु रुद्रमरुत: स्तुन्वानि दिव्यै स्तवैवेदे:।
सांग पदक्रमोपनिषदै गार्यन्ति यं सामगा:।
ध्यानावस्थित तद्गतेन मनसा पश्यति यं योगिनो
यस्यातं न विदु: सुरासुरगणा दैवाय तस्मै नम:।।


 

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