दही हांडी क्यों मनाते हैं?
जैसा कि किंवदंती है, भगवान कृष्ण को मक्खन, मिश्री और दही बहुत ही प्रिय थीं। वे अक्सर अपने घर में रखे बर्तनों से इसे चुरा लेते थे। इसलिए, उन्हें प्यार से 'माखन चोर' कहा जाता है। भगवान कृष्ण की माँ यशोदा अपने बेटे के इस शरारत से परेशान होकर माखन की हांडी को ऊंचाई पर लटका देती थीं। लेकिन, नटखट बाल गोपाल अपने दोस्तों के साथ मिलकर ऊंचाई पर लटकी हांडी को भी तोड़ दिया करते थे। इसके लिए वे अपने दोस्तों के कांधे पर चढ़ जाते थे, ताकि हांडी तक पहुंच जाएं। और इसी तरह से दही हांडी महोत्सव का आयोजन शुरु हुआ।
दही हांडी का महत्व
दही हांडी महोत्सव के दौरान हांडी को तोड़ने के लिए अलग-अलग तरीके से प्रतियोगिता रखी जाती है और जो भी हांडी फोड़ देता है उसे ईनाम दिया जाता है। इसमें लोग मानव पिरामिड बनाते हैं। इसमें व्यक्ति धीरे-धीरे सभी के कंधों पर चढ़ता हुआ शीर्ष पर पहुंचता है और हांडी को फोड़ देता है। हालांकि, ये काफी मुश्किल भरा काम है, जिसमें बार-बार लोग नीचे गिर जाते हैं। हर जगह अलग तरीके से दही हांडी की प्रतियोगिता रखी जाती है।
दही हांडी में क्या चीजें डाली जाती हैं
दही हांडी में एक साफ और नए मटके में दही, दूध, घी, कुछ कटे हुए फल जैसे सेब, केला, अनार दाने, अंगूर, सूखे मेवे जैसे काजू, किशमिश, बादाम आदि डाला जाता है। इसके बाद पानी मिलाकर इसे अच्छी तरह से फेंटा जाता है। आजकल दही हांडी में लोग सूखा मेवा और कुछ धन राशि भी डालते हैं।