वसंत ऋतु, यज्ञोपवीत संस्कार, यज्ञ और सूर्य पूजन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त काल है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे छः ऋतुओं में वसंत हैं। वेदों में लिखा है कि वसंत ऋतु सभी पदार्थों को आनंद बांटती है। इससे जड़ पदार्थों में भी जीवन का संचार होने लगता है।
पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि की शुरुआत 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 41 मिनट से हो रही है। अगले दिन 14 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 09 मिनट पर इसका समापन होगा। उदया तिथि के अनुसार इस साल वसंत पंचमी का पर्व 14 फरवरी को मनाया जाएगा।
सरस्वती पूजन का महत्व
सरस्वती मां को सत्वगुणसम्पन्ना माना गया है, इनके नाम हैं जिसमें वाक्,वाणी,गीः,गिरा,भाषा,शारदा,वाचा,वागीश्वरी,ब्रह्मी,गौ,सोमलता,वाग्देवी आदि नामों से भी जानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि सरस्वती देवी की पूजा से रोग,शोक,चिंताएं और मन का संचित विकार भी दूर होता है। मां की उपासना से व्यक्ति में विवेक का विकास होता है। सरस्वती की पूजा-आराधना में मानव कल्याण का समग्र जीवन दर्शन निहित है। सतत अध्ययन ही सरस्वती की सच्ची आराधना है।
मां सरस्वती की पूजाविधि
इस दिन सुबह स्नानादि के पश्चात श्वेत अथवा पीले वस्त्र धारण कर विधिपूर्वक कलश स्थापना करें। वास्तु के अनुसार पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा को सरस्वती पूजा के लिए आदर्श स्थान माना जाता है। इस दिशा में व्यवस्था न होने पर आप पूर्व,उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में भी पूजन कर सकते हैं। चौकी पर श्वेत अथवा पीला कपड़ा बिछाकर मां सरस्वती की मूर्ति या फोटो स्थापित करें। गंगाजल से उन्हें स्नान कराएं ,व पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
रोली, चन्दन, हल्दी, केसर,अक्षत, पीले या सफ़ेद रंग के पुष्प और पीली मिठाई अर्पित करें। मां सरस्वती की वंदना का पाठ करें। विद्यार्थी चाहे तो इस दिन मां सरस्वती के लिए व्रत भी रख सकते हैं। यथाशक्ति ''ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः '' का जाप करें । इस मंत्र के जाप से मां सरस्वती जल्दी प्रसन्न होती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पीले रंग का महत्व
पीला रंग अहिंसा,प्रेम,आनंद और ज्ञान का प्रतीक है।श्री विष्णु और उनके अवतारों को पीताम्बर धारण करवाने का यह प्रमुख कारण है। यह रंग सौंदर्य और आध्यात्मिक तेज को तो निखरता ही है,साथ ही पीले वस्त्र धारण करने से देव गुरु वृहस्पति भी प्रसंन होकर अपनी कृपा बरसाते हैं। पीला रंग व्यक्ति के स्नायु तंत्र को संतुलित व मस्तिष्क को सक्रिय रखता है। पीला रंग शुद्ध और सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक माना गया है। वसंत पंचमी के दिन सूर्य उत्तरायण होता है, सूर्य की किरणों से पृथ्वी पीली होती जाती है। सूर्य की पीली किरणें इस बात का प्रतीक है कि हमे सूर्य की तरह गंभीर और प्रखर बनना चाहिए। इस दिन पीले रंग के प्रयोग से सौंदर्य और आध्यात्मिक तेज में वृद्धि होती है।