संकष्टी चतुर्थी तिथि
आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आरंभ : 25 जून मंगलवार , 01:23 ए एम से
आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि समाप्त: 25 जून मंगलवार, 11:10 पी एम पर
उदयातिथि के आधार पर आषाढ़ की संकष्टी चतुर्थी व्रत 25 जून को रखा जाएगा।
संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त
संकष्टी चतुर्थी वाले दिन सुबह से लेकर दोपहर 02:32 बजे तक श्रवण नक्षत्र है।
ब्रह्म मुहूर्त- प्रातः 04:05 से प्रातः 04:45 तक है।
अभिजीत मुहूर्त- प्रातः 11:59 से दोपहर 12:47 तक है।
संकष्टी चतुर्थी के दिन चर-सामान्य मुहूर्त- प्रातः 08:54 से प्रातः 10:39 तक,
लाभ-उन्नति मुहूर्त- प्रातः 10:39 से दोपहर 12:24
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त- दोपहर 12:24 से दोपहर 02:09 तक है।
चंद्र अर्घ्य का समय
25 जून को रात्रि 10:27 पर चंद्रोदय होगा। ऐसे में संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने वाले तभी चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र अर्घ्य के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि
- चतुर्थी तिथि के दिन गणपति की विधि-विधान से पूजा करना चाहिए।
- संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करें।
- इसके बाद पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थल को साफ करें, गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करें।
- फिर चौकी पर पीले या लाल रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
- गणपति बप्पा को हल्दी, कुमकुम और अक्षत से तिलक लगाएं।
- फूल माला, दूर्वा, फल, मोदक, लड्डू अर्पित करें।
- देसी घी का दीपक जलाएं।
- इसके बाद संकष्टी चतुर्थी कथा का पाठ करें और गणेश जी के मंत्रों जाप करें
- आखिर में गणेश जी की आरती करें।
- चंद्रोदय होने पर चंद्र देव को अर्घ्य दें, फिर प्रसाद कहकर व्रत का पारण करें।
- ध्यान रहे कि इस व्रत का पारण करते हुए सात्विक भोजन ही करें।
- चतुर्थी के दिन ना तो तामसिक चीजों का सेवन करें और ना ही घर में तामसिक चीजें लाएं।