हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। हर महीने दो एकादशी होती हैं, जिससे साल भर में कुल 24 एकादशी आती हैं। सभी एकादशी को विशेष माना जाता है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है, जिसे आंवला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन व्रत के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा का महत्व है। आइए जानते हैं कि आमलकी एकादशी कब है, इसका शुभ मुहूर्त और व्रत के पारण का समय क्या है।
आमलकी एकादशी तिथि
फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ: 9 मार्च, रविवार, प्रातः 7: 45 मिनट पर
फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त: 10 मार्च, सोमवार, प्रातः 7:44 मिनट पर
उदयातिथि के अनुसार आमलकी एकादशी 10 मार्च को रहेगी।
आमलकी एकादशी व्रत पारण समय
आमलकी एकादशी के व्रत के पारण का शुभ मुहूर्त: 11 मार्च, मंगलवार, प्रातः 6: 50 मिनट से प्रातः 8 बजकर 13 मिनट तक
11 मार्च को द्वादशी तिथि का समय सुबह 8 बजकर 13 मिनट तक है।
आमलकी एकादशी व्रत का महत्व
हिंदू धर्म के शास्त्रों में उल्लेख है कि जो लोग अमलाकी एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें सैकड़ों तीर्थों और अनेक यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है। मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा और व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। अमलाकी एकादशी के दिन व्रत और पूजा करने से जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं, जिससे सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है।
आंवले के पेड़ की पूजा का महत्व
हिंदू धर्म में आंवला या आमलकी का पेड़ अत्यंत पवित्र माना गया है। इस पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है, इसलिए अमलाकी एकादशी के दिन इसकी पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन आमलकी के पेड़ की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।