अंतिम संस्कार के दौरान परिजन
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रोते-बिलखते रहे लोग
एक ही गांव के आठ लोगों के अंतिम संस्कार के वक्त लोगों के रोने-बिलखने के सिवा चारों ओर कुछ भी न तो सुनाई दे रहा था न ही दिखाई दे रहा था। वहां मौजूद एक व्यक्ति ने बताया कि मेरे जीने का सहारा और मकसद दोनों ही मेरी जिंदगी से जा चुके हैं। मेरा बेटा चूड़ामन कोल भाजपा की रैली में गया तो जिंदा था, लेकिन वापस मैं उसका मुंह नहीं देख सका। शायद ईश्वर को यही मंजूर था। वहीं, मेरी पत्नी दयावती का रो-रो कर बुरा हाल है। वह बार-बार सिर्फ घर की चारदीवारी को देखते हुए छोटे-छोटे कह कर विलाप कर रही है।
उन्होंने कहा कि वह सिर्फ यही कहती है कि मेरा 20 साल का जवान बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। उसको लेकर के मैं बड़े-बड़े सपने देखा करती थी, जिसको अमित शाह की रैली ने चकनाचूर कर दिया।