युग के पिता विनोद कुमार और मां पिंकी ने कहा कि दो साल 15 दिन बीत चुके हैं, अभी तक हमें बच्चे की अस्थियां नहीं मिली हैं। विनोद कुमार ने कहा कि कोर्ट के फैसले से हम संतुष्ट हैं। न्यायपालिका पर हमारा विश्वास और बढ़ा है। इस लड़ाई में सरकार, पुलिस विभाग, सीआईडी, शिमला शहर और प्रदेश भर के लोगों ने हमारा सहयोग किया।
विशेषतौर पर सीआईडी के इनवेस्टिगेशन आफिसर अनिल और राजेश, जिला न्यायवादी रणदीप परमार उनके सहयोगी लोकेंद्र और जितेंद्र, व्यापार मंडल शिमला के अध्यक्ष भाई इंद्रजीत सिंह ने हमारा भरपूर सहयोग दिया।
22 अगस्त 2016 को भराड़ी टैंक से युग का कंकाल बरामद हुआ था। इसके बाद अवशेषों को आईजीएमसी भेजा गया जहां डॉक्टरों ने इसे इंसानी बच्चे का कंकाल होने की पुष्टि की। इसके बाद युग के माता-पिता के डीएनए से मिलान हो गया।
न्यायालय में वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर यह साबित कर दिया गया कि टैंक से मिला कंकाल युग का ही था। युग के अवशेषों को बतौर सबूत मालखाने में जमा करवा दिया। जिला न्यायवादी रणदीप परमार ने बताया कि युग के परिजन अवशेष हासिल करने के लिए न्यायालय को पत्र लिख सकते हैं। न्यायालय के आदेशों पर पुलिस परिजनों को युग के अवशेष सौंप सकती है।
युग के हत्यारों को फांसी की सजा के बाद रिश्तेदार सांत्वना देने घर पहुंच रहे हैं। पड़ोस में रहने वाली महिलाओं का तो यहां तक कहना था कि युग के हत्यारों को रिज पर फांसी देनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी घिनौनी हरकत करने की सोचे भी नहीं।
युग की मां पिंकी बेहद भावुक दिखी। फैसले के बावजूदरात को पिंकी सही से खाना तक नहीं खा पाई। रसोई घर में काम करते हुए भी युग की याद में खोई रही। पिता विनोद कुमार सुबह दुकान पर बैठे तो आसपास के दुकानदार भी सांत्वना देने दुकान पर पहुंचे और कोर्ट के फैसले को सही बताया।
विनोद कुमार के चचेरे भाई राम किशोर लखनऊ से शिमला पहुंचे। राम किशोर ने बताया कि हम तो यही चाहते हैं कि उच्च न्यायालय अब इस मामले की सुनवाई न कर इसे तुरंत खारिज कर दे। युग के पिता विनोद की बहन और भांजा कार्तिक भी घर पर आए और गमगीन दिखे।