बरामद वीडियो क्लिप में बच्चा नंगा था और ‘पापा-पापा बचाओ’ चिल्लाता नजर आ रहा था। यह दोषियों की दरिंदगी की हद ही थी कि वीडियो में उस समय पीछे म्यूजिक बज रहा था। सात दिन के बाद दोषियों ने मासूम के गले में पत्थर बांध कर उसे जिंदा पानी से भरे टैंक में फेंक दिया।
माता-पिता के इकलौते बेटे की इस निर्मम हत्या ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था। अदालत ने कहा कि दोषियों का कोई बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, मगर इस केस में अभियोजन पक्ष ने अपहरण और हत्या के घिनौने तरीके को लेकर जो साक्ष्य सामने रखे, उससे यह एक असाधारण अपराध की श्रेणी में आता है।
अदालत ने फैसले की टिप्पणी में युग के माता-पिता के अपने बच्चे के अंतिम संस्कार न कर पाने का भी जिक्र कर इसे भावनात्मक सदमा बताया है। चूंकि इस केस की जांच में बरामद अस्थियों के केस प्रापर्टी होने के कारण वे अपने बच्चे का चार साल बाद भी अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाए हैं। इसलिए उनके दुर्भाग्य को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।