फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

युग हत्याकांड: गुनहगारों को फांसी की सजा के साथ कोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी

Fri, 07 Sep 2018 12:20 PM IST
नरेंद्र एस कंवर, अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन

चार साल के मासूम युग के अपहरण और उसकी निर्मम हत्या के मामले पर तीनों दोषियों को सजा-ए-मौत के फैसले के साथ अदालत ने तलख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा हत्यारों ने पड़ोस के विश्वास को तोड़ा है। लोग इस विश्वास के साथ अपने बच्चों को घर पर अकेला भी छोड़ देते हैं कि पड़ोसी उनके बच्चों की देखभाल करेंगे, लेकिन युग के हत्यारों ने इस विश्वास को ही तोड़ दिया।  

विज्ञापन


गुनहगार चंद्र शर्मा और तेजिंद्र पाल युग के पड़ोसी थे और उनके परिवारों में कोई दुश्मनी नहीं थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने इस अपराध को असाधारण और जघन्य श्रेणी (रेयरेस्ट आफ रेयर) का करार दिया है।

अच्छे घर से होने के बावजूद तीनों ने रातोंरात करोड़पति बनने के लालच में सुनियोजित तरीके से मासूम का अपहरण कर उसकी निर्मम हत्या कर दी। कोर्ट ने फैसले में कहा कि दोषियों ने इस जघन्य अपराध को जल्दबाजी में नहीं, बल्कि ठंडे दिमाग से अंजाम दिया।
विज्ञापन


छह पन्नों के फैसले में कोर्ट ने कहा है कि मासूम युग को मालूम नहीं था कि उसके साथ ये सब क्यों हो रहा है। उसे 14 से 21 जून मध्य रात्रि तक प्रताड़ित किया जाता रहा।

विज्ञापन

टिप्पणी में बच्चे के अंतिम संस्कार से वंचित रहने का भी जिक्र

बरामद वीडियो क्लिप में बच्चा नंगा था और ‘पापा-पापा बचाओ’ चिल्लाता नजर आ रहा था। यह दोषियों की दरिंदगी की हद ही थी कि वीडियो में उस समय पीछे म्यूजिक बज रहा था। सात दिन के बाद दोषियों ने मासूम के गले में पत्थर बांध कर उसे जिंदा पानी से भरे टैंक में फेंक दिया।

माता-पिता के इकलौते बेटे की इस निर्मम हत्या ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था। अदालत ने कहा कि दोषियों का कोई बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, मगर इस केस में अभियोजन पक्ष ने अपहरण और हत्या के घिनौने तरीके को लेकर जो साक्ष्य सामने रखे, उससे यह एक असाधारण अपराध की श्रेणी में आता है।

अदालत ने फैसले की टिप्पणी में युग के माता-पिता के अपने बच्चे के अंतिम संस्कार न कर पाने का भी जिक्र कर इसे भावनात्मक सदमा बताया है। चूंकि इस केस की जांच में बरामद अस्थियों के केस प्रापर्टी होने के कारण वे अपने बच्चे का चार साल बाद भी अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाए हैं। इसलिए उनके दुर्भाग्य को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें