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Shimla News: गेयटी थियेटर में कवि दरबार में साहित्यकारों ने बटोरी वाहवाही

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कविता की कोई निश्चित परिभाषा नहीं : प्रो. अब्दुल
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घर बसाने के लिए घर छोड़ देती है लड़कियां कविता छाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमालय साहित्य संस्कृति मंच शिमला और ओजस सेंटर फॉर आर्ट एंड रीडरशिप डवेलपमेंट (ओकार्ड) की ओर से गेयटी थियेटर के कान्फ्रेंस हॉल में कवि दरबार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें देशभर के विभिन्न भागों से आए रचनाकारों ने भाग लिया। इस अवसर पर डॉ. ज्योत्सना मिश्रा ने, घर बसाने के लिए घर छोड़ जाती हैं लड़कियां कविता पढ़कर खूब वाहवाही बटोरी।

प्रख्यात साहित्यकार एवं शिक्षाविद प्रो. अब्दुल बिस्मिल्लाह ने कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि कविता और गज़ल की व्याख्या करना ऐसा ही है जैसे फूल की पंखुड़ियां नोंच कर मालूम करना है कि उसमें से खुशबू कहां से आ रही है। उन्होंने कहा कि कविता की कोई निश्चित परिभाषा नहीं हो सकती है। युवा लेखिका जहान्वी का उपन्यास किरदार-ए-नकाब का लोकार्पण भी किया गया। कवि दरबार कार्यक्रम का मंच संचालन जगदीश बाली ने किया।
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इस अवसर पर करीब पचास वरिष्ठ नवोदय और महिला साहित्यकारों ने कविता पाठ किया। इस अवसर पर हिमालय मंच शिमला के अध्यक्ष एसआर हरनोट ने किया। कार्यक्रम में ओकार्ड इंडिया के निदेशक राकेश गुप्ता, सेतु पत्रिका के संपादक डाॅ. देवेंद्र कुमार गुप्ता, डाॅ. ज्योत्सना मिश्रा, डॉ. कर्म सिंह, गुलपाल, हितेंद्र शर्मा, डॉ. अनीता शर्मा, कल्पना गांगटा, उमा नधैक, अनिल शर्मा नील, नीता अग्रवाल, लखविंदर सिंह, स्नेहा हरनोट, हेमलता, मनोज शर्मा, जाह्नवी, अतुल, आयुष, स्वप्निल सूर्यान सहित अन्य कवि और कवयित्री मौजूद रही।
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