मजदूरों की सहायता राशि, पंजीकरण और नवीनीकरण पर रोक लगाने के मामले में सीटू से संबंधित मनरेगा और निर्माण मजदूर फेडरेशन ने सोमवार को शिमला में सचिवालय के बाहर प्रदर्शन प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदेश के सभी जिलों से आए मजदूर सुबह टॉलैंड चौक पर एकत्रित हुए। हाथों में बैनर और प्ले कार्ड लेकर सचिवालय तक जुलूस निकाला। पुलिस के रोकने पर मजदूर सड़क पर ही बैठ गए। इससे जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। जाम लगने से वाहन चालकों को परेशानी झेलनी पड़ी। इसके बाद श्रम मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल से एक सप्ताह के भीतर सहायता राशि और अन्य मांगें पूरी करने का आश्वासन मिलने के बाद मजदूरों ने प्रदर्शन को स्थगित कर दिया।
सीटू के राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि सुक्खू सरकार ने शपथ ग्रहण समारोह के दूसरे दिन ही प्रदेश के साढ़े चार लाख मजदूरों को श्रमिक कल्याण बोर्ड से मिलने वाली सहायता राशि और उनके बोर्ड में पंजीकरण व नवीनीकरण पर गैर कानूनी तरीके से पर रोक लगा दी गई। फेडरेशन के राज्य अध्यक्ष जोगिंद्र कुमार एवं महासचिव भूपेंद्र सिंह ने कहा कि 12 दिसंबर, 2022 को जारी अधिसूचना से मनरेगा मजदूरों के लाभ रोक दिए। आठ फरवरी को जारी एक गैर कानूनी अधिसूचना के बाद भवन निर्माण मजदूरों का पंजीकरण और नवीनीकरण भी रोक दिया। बीते छह माह से बोर्ड का काम पूर्ण रूप में बंद है। मजदूरों के लाभ बहाल करने की मांग की गई, लेकिन रोक हटाई नहीं गई है।
सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर ने कहा कि बोर्ड में पिछले दस साल में सबसे ज्यादा 75 हजार हमीरपुर जिले के सदस्य बने हैं। उन्हें बोर्ड से कई करोड़ के फायदे मिल चुके हैं। मुख्यमंत्री और उनके राजनीतिक सलाहकार हमीरपुर से ही संबंध रखते हैं। इन्होंने मिलकर ये रोक लगाई है। सीटू राज्य महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि अगर मजदूरों के लाभ जारी नहीं किए गए तो प्रदर्शन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से 6 जून को होने वाली मंत्रिमंडल बैठक में उचित फैसला करने की मांग की। इस अवसर पर सीटू के पदाधिकारी रविंद्र कुमार, जगत राम, कुलदीप डोगरा, अजय दुलटा, राजेश शर्मा, गुरदास वर्मा, सुनील मेहता, चमन लाल, आशीष कुमार, मोहित, नरेंद्र, रंजन शर्मा और सुरेश राठौर सहित यूनियन के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।