सबसे किफायती गेंदबाजी की
भारत और दक्षिण अफ्रीका के फाइनल मैच में तेज गेंदबाज रेणुका सिंह ठाकुर ने सबसे किफायती गेंदबाजी की। उन्होंने मैच में आठ ओवरों की गेंदबाजी की। हालांकि, उन्हें कोई विकेट नहीं मिला फिर भी उन्होंने बेहद कंजूसी भरी गेंदबाजी की। उन्होंने 3.50 की इकोनॉमी के साथ महज 28 रन खर्च किए। उनकी कसी हुई गेंदबाजी के कारण दक्षिण अफ्रीका की टीम को रन बनाने में परेशानी हुई।
हरलीन का भी यादगार प्रदर्शन, 169 रन बनाए
भारतीय महिलाओं की ऐतिहासिक जीत में हिमाचल से रेणुका ठाकुर के अलावा हरलीन देओल का प्रदर्शन भी खासा यादगार रहा। हालांकि, हरलीन सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबला नहीं खेल सकीं। उन्होंने प्रतियोगिता में कुल छह मुकाबले खेले और बल्ले से 169 रन बनाए। श्रीलंका के खिलाफ 48 और पाकिस्तान के विरुद्ध उन्होंने 46 रन की महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी लीग मुकाबले में हरलीन के बल्ले से 38 रन की पारी निकली। इंग्लैंड के खिलाफ भी 24 रन बनाए। हरलीन देओल हिमाचल प्रदेश की क्रिकेट टीम की नियमित सदस्य हैं और लंबे समय से भारत के लिए भी खेल रही हैं।
हिमाचल की बेटी रेणुका की मौजूदगी में जीत खास : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया है। यह सिर्फ जीत नहीं, बल्कि हर उस सपने की जीत है जो किसी लड़की ने बैट या बॉल उठाते वक्त देखा था। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारत की बेटियों ने मैदान पर ऐसा तूफान मचाया कि पूरी दुनिया दंग रह गई। आज पूरा देश एक सांस में, एक भावना में भारत-भारत चिल्ला रहा था। इस ऐतिहासिक पल को और खास बनाती है हिमाचल की बेटी रेणुका ठाकुर की इस टीम में मौजूदगी। उन्होंने अपने दमखम से इस जीत में नया जोश भरा।
भाई ने कहा ऑल द बेस्ट : रेणुका
के भाई विनोद ठाकुर ने भी अपनी बहन से फोन पर बात करते हुए 'ऑल द बेस्ट' कहा। जैसे-जैसे मैच शुरू होने का समय नजदीक आता गया, रेणुका के घर पर परिवारजन और रिश्तेदारों का जमावड़ा बढ़ता गया। घर पर मैच देखने वालों के लिए दिनभर भोजन बनाने की तैयारियां चलती रहीं। माहौल उत्सव से कम नहीं था। लोग रेणुका की जिंदगी के इस सबसे बड़े पल का जश्न एक साथ मनाना चाहते थे।
10 नंबर की जर्सी वाले ये हैं महान खिलाड़ी
- 10 नंबर की जर्सी पहनती हैं रेणुका
- सचिन तेंदुलकर : (भारत) उनके सम्मान में भारत में यह नंबर रिटायर कर दिया।
- लसिथ मलिंगा (श्रीलंका) अपने स्लिंगिंग एक्शन और घातक यॉर्कर्स के लिए प्रसिद्ध
- कुमार संगकारा (श्रीलंका) कुछ टूर्नामेंटों में उन्होंने भी 10 नंबर की जर्सी पहनी थी।
- शाकिब अल हसन : (बांग्लादेश)- विश्व के शीर्ष ऑलराउंडरों में से एक।
रेणुका का गेंदबाजी कॅरिअर
टेस्ट वनडे टी-20
मैच 3 27 54
पारी 6 26 53
विकेट 2 41 58
औसत 90 25 21
स्ट्राइक रेट 150 30 20
बचपन में लड़कों के साथ कपड़े की गेंदों से खेलती थी क्रिकेट: मां
रेणुका सिंह ठाकुर को बचपन में क्रिकेट का बहुत शौक था और वह अपने मोहल्ले के लड़कों के साथ घर में बने लकड़ी के बल्ले और कपड़े की गेंदों से खेलती थीं। रेणुका की मां सुनीता ने यह भी बताया कि उनके दिवंगत पति क्रिकेट प्रेमी थे और चाहते थे कि रेणुका इस खेल में अच्छा प्रदर्शन करे। सुनीता ने सोमवार को कहा, 'मेरे पति क्रिकेट के बहुत बड़े प्रशंसक थे और चाहते थे कि बच्चों में से कोई एक खेल या कबड्डी चुने और भले ही वह हमारे साथ नहीं हैं, मेरी बेटी ने उनके सपने पूरे किए हैं।' रेणुका को हमेशा से क्रिकेट का शौक था और वह बचपन से ही लड़कों के साथ यह खेल खेलती थी। छोटी बच्ची के रूप में, वह सड़क किनारे कपड़े की गेंद बनाकर लकड़ी के बल्ले से खेला करती थी।
रेणुका के पिता केहर सिंह ठाकुर, जो राज्य के सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे, का निधन तब हुआ जब वह मात्र तीन वर्ष की थीं। वह अपने शरीर पर बने पिता के टैटू से खेलती थीं।
सुनीता के एक रिश्तेदार ने बताया कि केहर क्रिकेट के इतने शौकीन थे कि उन्होंने अपने पहले बच्चे का नाम विनोद कांबली के नाम पर विनोद ठाकुर रखा, जो उस समय सचिन तेंदुलकर के साथ स्टार क्रिकेटर थे। सुनीता ने बताया कि रेणुका के चाचा ने ही उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें क्रिकेट से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि मेरे देवर भूपिंदर ठाकुर ने रेणुका की प्रतिभा देखी और कहा कि इस लड़की में क्षमता है और उनके सहयोग से ही रेणुका को आगे बढ़ने का मौका मिला। रेणुका के चाचा उस समय शारीरिक शिक्षा के शिक्षक थे और उन्होंने ही उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें धर्मशाला क्रिकेट अकादमी भेजा, जहां से उनके कॅरियर की शुरुआत हुई।