संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। महिला को तलाक के 11 साल बाद अपने वैधानिक अधिकार प्राप्त हुए। राज्य महिला आयोग के हस्तक्षेप के बाद यह संभव हो पाया। इस महिला का तलाक वर्ष 2015 में हो चुका था। इसके बावजूद भी उसे पूर्व पति से गुजारा भत्ता और अन्य अधिकार नहीं मिल रहा था।
महिला ने कई साल इंतजार करने के बाद राज्य महिला आयोग में न्याय की गुहार लगाई। आयोग ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई की और पूर्व पति को नोटिस जारी कर शनिवार को सुनवाई के लिए बुलाया। लंबी बातचीत और मध्यस्थता के बाद पूर्व पति अधिकारों को देने के लिए सहमत हुआ। इस दौरान पूर्व पति महिला को गुजारा भत्ता और उसका सामान देने जो ससुराल में था देने के लिए राजी हो गया। इस फैसले से महिला को बड़ी राहत मिली है।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी ने कहा कि इस मौके पर राज्य महिला आयोग ने आज दो मामलों की सुनवाई की। इनमें से एक मामले का दोनों पक्षों के बीच राजीनामा होने के बाद सफलतापूर्वक समाधान कर दिया। आपसी सहमति बनने के बाद महिला को उसके सभी वैधानिक अधिकार दिलाए गए। दूसरा मामला अभी विचाराधीन है। इस दौरान आयोग की सदस्य रीना पुंडीर, सदस्य सचिव बुशरा अंसारी, विधि अधिकारी यशपाल शर्मा और जूनियर सहायक राधिका उपस्थित रही।