मातृत्व अवकाश के बाद दोबारा काम पर लौटने पर सोलन के एक निजी विश्वविद्यालय ने महिला कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया। इस दौरान विवि की ओर से महिला को तीन महीने का वेतन भी नही दिया गया। महिला ने इंसाफ के लिए राज्य महिला आयोग में गुहार लगाई है।
महिला की शिकायत पर आयोग ने निजी विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई में पूरा रिकार्ड लाने के आदेश दिए हैं। आयोग के पास की गई शिकायत के अनुसार महिला कर्मचारी आठ सालों से बतौर सहायक प्रबंधन के तौर पर विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं दे रही थी। महिला एक मई से 31 जुलाई तक मातृत्व अवकाश पर गई।
तीन महीने बाद दोबारा काम पर आई तो विवि प्रशासन ने उसे ड्यूटी पर आने से मना कर दिया और विवि से बाहर का रास्ता दिखा दिया। शिकायतकर्ता महिला ने विवि प्रशासन पर आरोप लगाया कि ज्वाइनिंग के दो दिन पहले विवि की ओर से उसे टर्मिनेशन नोटिस दिया गया और दोबारा ज्वाइन करने से मना कर दिया।
इसके अलावा मातृत्व अवकाश देने से भी मना कर दिया। इस दौरान महिला कई बार विवि से नौकरी में दोबारा ज्वाइन करने की गुहार लगाती रही, लेकिन ग्यारह महीने बीतने के बाद भी नौकरी पर नहीं रखा गया।
शलूनी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर पीके खोसला ने कहा कि महिला कर्मचारी को अधिकारिक तौर पर ड्यूटी से नही निकाला गया है। महिला को मातृत्व अवकाश का वेतन दिया जाएगा।
निजी विवि से तलब किया गया है रिकॉर्ड
शिकायतकर्ता महिला ने सोलन की एक निजी विश्वविद्यालय पर नौकरी से निकालने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर विवि प्रशासन को आयोग की अगली सुनवाई में पूरा रिकार्ड लेकर आने के आदेश दिए गए हैं।