भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की जलविद्युत परियोजनाओं में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का मामला हिमाचल ने नॉर्दन जोनल काउंसिल की शनिवार को जयपुर में हुई बैठक के दौरान उठाया।
उत्तर भारत के 6 राज्यों की काउंसिल में मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने ऊर्जा उत्पादन में हिस्सेदारी देने में देरी पर आपत्ति जताई।
हालांकि, बैठक में पंजाब सरकार का रुख सकारात्मक दिखा। इसके अलावा हिमाचल ने पंजाब, हरियाणा और जम्मू कश्मीर के साथ अलग अलग क्षेत्रों में चल रहे सीमा विवादों के जल्द निस्तारण का विषय भी रखा।
मुख्य सचिव स्तरीय बैठक में तय एजेंडा प्रस्तावों पर अब सभी सदस्य प्रदेशों के मुख्यमंत्री बैठक कर अंतिम निर्णय लेंगे।
बैठक में मुख्य सचिवों ने 6 राज्यों के बीच सीमांत विवाद, अंतरराज्यीय ट्रांसपोर्ट, राजस्व विवादों के साथ सहभागिता से चलने वाली योजनाओं पर चर्चा की।
बैठक में हिमाचल के मुख्य सचिव विनीत चौैधरी ने प्राथमिकता के आधार पर बीबीएमबी के पावर प्रोजेक्टों में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया।
मई 2017 में काउंसिल की बैठक में इस मुद्दे पर पंजाब की ओर से आश्वासन मिला था, लेकिन अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। पंजाब ने आश्वस्त किया है कि लंबे समय से मामला विचाराधीन है।
ऐसे में औपचारिकताएं पूरी करने में समय लग रहा है। परिसंपत्तियों के हस्तांतरण में हिमाचल ने जोगिंद्रनगर स्थित शानन पावर हाउस का अधिकार पंजाब से लेने का विषय भी रखा है।
इसके अलावा पिछली बैठक में हरियाणा के साथ परवाणू और पंजाब के साथ कंडवाल सीमांत विवाद आगे नहीं बढ़ रहा है, जिस पर तीनों पक्षों में आम सहमति बनाने पर जोर डाला। जम्मू कश्मीर के साथ लाहौल-स्पीति के दो क्षेत्रों में सीमा अतिक्रमण पर चर्चा हुई।
अधिकारियों ने काउंसिल की मुख्यमंत्रियों के स्तर पर प्रस्तावित बैठक के लिए एजेंडा तय किया है। इस बैठक में तय एजेंडे पर 6 राज्यों के मुख्यमंत्री आम सहमति से निर्णय लेंगे।
पौंग विस्थापितों के मुद्दे पर भी होगी चर्चा
मुख्य सचिव स्तरीय बैठक के बाद मुख्यमंत्रियों की होने वाली बैठक में हिमाचल पौंग विस्थापितों का मुद्दा भी एजेंडे में शामिल हो सकता है।
हिमाचल में जिला कांगड़ा के देहरा और नूरपुर इलाके में पौंग बांध विस्थापितों को राजस्थान में पुनर्वास के लिए भूमि पट्टे दिए गए हैं।
6 दशक से विस्थापन और पुनर्वास की जद्द में आए 339 गांवों से लगभग 2501 परिवार के पुनर्वास का मसला अभी भी सुलझा नहीं है, जबकि 20 हजार से अधिक परिवारों को राहत मिल चुकी है।