वीरभद्र सिंह की गैर मौजूदगी में प्रदेश में चार क्षेत्रों के उप उपचुनाव जीतने के बाद कांग्रेस नेताओं के हौसले बुलंद जरूर हैं। इस बार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए प्रदेश कांग्रेस का चेहरा कौन होगा, यह फिलहाल तय नहीं है।
प्रदेश में भाजपा को विधानसभा चुनाव में चुनौती देने से पहले कांग्रेस के समक्ष बड़ी चुनौती चेहरा तलाशना रहेगा। अभी तक पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को चेहरा बनाकर कांग्रेस प्रदेश में चुनाव लड़ती रही है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के जाने के बाद से प्रदेश में कांग्रेस को करारा झटका लगा है। वीरभद्र समर्थक पूर्व मुख्यमंत्री के निधन से ज्यादा चिंतित हैं और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले खासे चिंतित हैं।
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प्रदेश की राजनीति में अपनी जडे़ं जमाने के लिए पिछले कई साल से कांग्रेस से जुडे़ लोग भी स्वयं को आहत महसूस कर रहे हैं। वीरभद्र सिंह के बूते राजनीति की वैतरणी पार करने के लिए पिछले कई साल से विधानसभा चुनाव लड़ने की चाह रखे कांग्रेस के कई नेता कतार में थे, उनको सबसे ज्यादा मायूसी हाथ लगी है।
वीरभद्र सिंह की गैर मौजूदगी में प्रदेश में चार क्षेत्रों के उप उपचुनाव जीतने के बाद कांग्रेस नेताओं के हौसले बुलंद जरूर हैं। इस बार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए प्रदेश कांग्रेस का चेहरा कौन होगा, यह फिलहाल तय नहीं है। हालांकि प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर पहले ही कह चुके हैं कि उप चुनाव जीतने के बाद कई कांग्रेसी नेता श्रेय लेने को दिल्ली की दौड़ लगाते रहे हैं।