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नए मुख्य सचिव पर फैसला लेने में पसोपेश में सरकार

Sun, 15 May 2016 09:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश सरकार
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नए मुख्य सचिव पर फैसला लेने में हिमाचल सरकार पसोपेश में पड़ गई है। नए सीएस की तैनाती के लिए ये पेंच अधिकारियों की वरिष्ठता और निकटता के बीच फंसकर रह गया है। 31 मई को वर्तमान मुख्य सचिव पी. मित्रा सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। इसी के साथ ही ये सवाल खड़ा हो गया है कि कौन हिमाचल का नया मुख्य सचिव होगा?
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नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी हाल ही में कहा था कि  इस पद पर तैनाती के लिए अधिकारियों की वरिष्ठता और योग्यता के अलावा राज्य सरकार का भरोसा भी मायने रखेगा। सीएम वीरभद्र सिंह के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों के रूप में वीसी फारका का नाम बार-बार सीएस पद के दावेदारों के रूप में आंका जा रहा है।

वीसी फारका बेशक अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर हैं और सीएम कार्यालय भी देख रहे हैं, मगर उनसे वरिष्ठता में कई अधिकारी इस पद के दावेदारों में माने जा रहे हैं। पी. मित्रा के बाद सबसे वरिष्ठ अधिकारी दीपक सानन हैं और वे 1982 बैच के हैं। उन्हें सरकार ने एक मामले में चार्जशीट दे रखी है। इसी बैच में सानन के बाद अजय मित्तल आते हैं।
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मित्तल भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर चले गए हैं। मित्तल के बाद 1982 बैच के ही अधिकारी विनीत चौधरी हैं। चौधरी से हाल ही में एक विभाग वापस लिया गया तो उन्होंने अपनी ही सरकार की स्थानांतरण नीति को जानने के लिए सिविल बोर्ड की बैठक की जानकारी आरटीआई तक में मांग ली थी। वे सरकार में अपनी कम पूछ से नाराज भी माने जा रहे हैं और मुख्य सचिव पद के प्रबल दावेदारों में से एक हैं।

इन अधिकारियों के बाद वरिष्ठता में 1983 बैच की आईएएस अधिकारी उपमा चौधरी का नाम आता है। उपमा चौधरी के बाद इसी बैच में एआर सिहाग हैं जो संघ लोक सेवा आयोग के सचिव हैं। माना जा रहा है कि उनकी मुख्य सचिव बनने में रुचि नहीं है और वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में ही संतुष्ट हैं।

सिहाब के बाद ही वीसी फारका का 1983 बैच में वरिष्ठता में नाम आता है। वे मुख्यमंत्री के सबसे भरोसेमंद अधिकारी माने जाते हैं। ऐसे में सरकार को अगर वीसी फारका को मुख्य सचिव बनाने पर निर्णय लेना हो तो कम से कम तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को मनाना ही होगी। सरकार इसी पसोपेश में उलझी है।
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