साल 2025 में दो नई लिफ्ट ने शहर को दी रफ्तार, बस अड्डे और पार्किंग ने आसान की राह
लापरवाही से लटकी 150 करोड़ की योजनाएं
पार्किंग, फ्लाईओवर, खेल मैदान अभी तक अधूरे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहरवासियों के लिए साल 2025 में लिफ्ट, रिज के नए परिसर समेत कई नई सौगात मिली लेकिन कई योजनाएं ऐसी भी रहीं जो विभागों की लेटलतीफी से सिरे नहीं चढ़ पाईं। इनमें शिमला रोपवे, खलीनी फ्लाईओवर जैसी मेगा परियोजनाएं ऐसी भी हैं जो इस साल भी टेंडर प्रक्रिया से आगे नहीं बढ़ पाईं। हालांकि ढली में बस अड्डा बनने और टुटू में पार्किंग बनने से लोगों की राहत आसान हुई है।
वहीं स्मार्ट सिटी मिशन की करीब 150 करोड़ की लागत वाली निर्माणाधीन योजनाएं इस साल भी पूरी नहीं हुईं। ज्यादातर योजनाएं जून तक पूरी होनी थी लेकिन दिसंबर में भी इनका काम पूरा नहीं हो रहा। 24 घंटे पानी का सपना इस साल भी अधूरा रह गया। पेयजल कंपनी ने पहले जून फिर अगस्त से सतलुज का पानी शिमला पहुंचाने का दावा किया था लेकिन दिसंबर तक भी सतलुज का पानी शकरोड़ी से आगे नहीं बढ़ पाया। राजधानी में पहली बार पूरे साल पानी की राशनिंग रही।
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सतलुज पेयजल योजना के काम की रफ्तार ऐसी है कि शहर की जनता को मार्च तक भी इसका पानी मिलेगा या नहीं, इस पर संशय है। मालरोड पर बिजली तारें, केबल, पेयजल लाइनें भूमिगत करने के लिए डक्ट बनाने का काम भी शुरू किया गया है। हालांकि, काम की रफ्तार इतनी सुस्त है कि छोटा शिमला से सीटीओ चौक तक इसका काम पूरा करने में अभी एक साल और लग जाएगा।
इस साल मिलीं यह पांच बड़ी सौगात 1. मिडल बाजार लिफ्ट 2. छोटा शिमला-विकासनगर लिफ्ट 3. टुटू में बहुमंजिला पार्किंग 4. रिज का नया परिसर 5. ढली में नया बसस्टैंड
सियासत के लिए भी याद रहेगा साल
साल 2025 नगर निगम में कांग्रेस शासित नगर निगम में गरमाई सियासत के लिए भी याद रखा जाएगा। मेयर-डिप्टी मेयर का कार्यकाल ढाई साल से बढ़ाकर पांच साल करने पर कांग्रेस पार्षद दो गुटों में बंट गए। मामला मुख्यमंत्री से लेकर दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचा। हालांकि साल के अंत तक विवाद शांत हो गया। निगम ने पहली बार शहर में कुत्तों की गणना करवाई। शहर में 3506 लावारिस कुत्ते मिले। स्वच्छता रैंकिंग में शिमला फिसड्डी रहा।