मध्य हिमालय जलागम विकास परियोजना अक्तूबर 2005 से विश्व बैंक के सहयोग से प्रदेश के दो जनजातीय जिलों किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर अन्य सभी 10 जिलों के 42 विकास खंडों की 602 ग्राम पंचायतों में कार्यान्वित की जा रही थी।
दस जिलों के तीन और विकास खंडों की 108 अतिरिक्त ग्राम पंचायतें इस परियोजना में सम्मिलित की गई और परियोजना राशि 395 करोड़ रुपये से बढ़कर 630.75 करोड़ रुपये की गई है। परियोजना की अवधि शुरू में वर्ष 2013 तक थी, उसे बढ़ाकर अब मार्च 2016 तक कर दिया गया है। यह जानकारी सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक डा. एमपी सूद ने दी है।
उन्होंने कहा कि योजना के कार्यान्वयन के दौरान उपलब्ध 70 प्रतिशत बंजर भूमि में पौधरोपण कर हरित आवरण वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई है। इस दौरान 10.78 लाख क्यूबिक मीटर क्षमता के कुल 8961 जलसंग्रहण ढांचों का निर्माण किया गया।
241 किलोमीटर लंबी सिंचाई कूहलें बनाई गईं। इस परियोजना की अवधि को एक और वर्ष यानी 31 मार्च 2017 तक बढ़ाने का मामला केंद्र सरकार को भेजा गया था, जिसे स्वीकृत कर दिया गया है। परियोजना अवधि बढ़ने से शेष बची 70 करोड़ रुपये की राशि को खर्च करने का अतिरिक्त समय मिला है।
जिससे प्रदेश में विकासात्मक कार्यों को और गति मिलेगी। मध्य हिमालय जलागम विकास परियोजना की अवधि मार्च 2017 को समाप्त होने की स्थिति में बायो-कार्बन सेल प्रदेश वन विभाग को स्थानांतरित कर दिया जाएगा, जिसे परियोजना समय के बाद भी कार्बन राजस्व का भुगतान स्थानीय पंचायतों और लाभार्थियों को मिलता रहेगा।