चौबीस घंटे पेयजल देने के प्रोजेक्ट पर अब खर्च होगा ज्यादा पैसा, कई शर्तों में बदलाव
शिमला। शहरवासियों को 24 घंटे पेयजल सप्लाई देने के लिए तैयार किए सतलुज वाटर प्रोजेक्ट की कई शर्तों में बदलाव करने का फैसला लिया है। दूसरी बार टेंडर रद्द होने के बाद शर्तें बदलनी पड़ी हैं।
शुक्रवार को आईपीएच विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। कंपनियों को प्रोजेक्ट में मुनाफा हो, इसके लिए टेंडर की लागत भी बढ़ाई जा रही है। अभी सतलुज से शिमला तक पेयजल लाइन बिछाने के लिए 293 करोड़ रुपये का टेंडर कॉल किया था। अब नए फैसले के बाद 300 करोड़ से अधिक लागत वाला टेंडर कॉल किया जाएगा। वर्ल्ड बैंक के इस प्रोजेक्ट का रखरखाव ठेका लेने वाली कंपनी को 12 की बजाय सात साल ही करना होगा। कंपनियों ने 12 साल तक प्रोजेक्ट का रखरखाव करने से मना कर दिया था। आवेदन करने वाली कंपनियों की पात्रता में कुछ रियायत देने पर भी फैसला लिया गया है। बैठक में लिए गए फैसलों पर अंतिम मुहर 25 सितंबर को होने वाली बीओडी की बैठक में लगेगी। पेयजल कंपनी का कहना है कि शर्तें घटाने के बाद जल्द ही नया टेंडर कॉल कर दिया जाएगा।
बैठक में पहुंची नामी कंपनियां
प्रधान सचिव के साथ हुई इस बैठक में कई नामी कंपनियों ने हिस्सा लिया। पेयजल कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को लेकर जानकारी दी। कहा कि दूसरी बार इस प्रोजेक्ट का पहले चरण का टेंडर रद्द करना पड़ा है। इस बारे में कंपनियों से पूछा गया कि आखिर उन्हें प्रोजेक्ट में किन शर्तों को लेकर दिक्कत आ रही है। इसके बाद कई शर्तें घटाने पर फैसला लिया है।
चार साल से लटका है प्रोजेक्ट, एक साल से टेंडर
कुल 986 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से शिमला सतलुज से शिमला तक नई पेयजल लाइनें बिछाई जाएंगी। शिमला को रोज इस परियोजना से 66 एमएलडी पानी मिलेगा। पहले चरण का टेंडर 293 करोड़ का था। इसमें सतलुज से शिमला तक 23 किलोमीटर लंबी पेयजल लाइन बिछनी हैं लेकिन कंपनियां इसके लिए तैयार नहीं हो रहीं। दो बार टेंडर रद्द हो चुका है। पेयजल कंपनी के एमडी धर्मेंद्र गिल ने कहा कि बैठक में जिन शर्तों पर चर्चा हुई है, उस पर बीओडी में अंतिम फैसला होगा।