कंपनी ने जांच के लिए फील्ड में उतारी टीमें
हर पेयजल लाइन और चाबी की होगी जांच
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में बड़े पैमाने पर पानी की चोरी होने का अंदेशा है। पेयजल कंपनी शहर में रोजाना 45 एमएलडी पानी की सप्लाई दे रही है लेकिन बिल वसूली 25 से 30 एमएलडी की ही हो रही है। बाकी पानी कहां जा रहा है और कौन पी रहा है, इसके लिए कंपनी ने जांच करवाने का फैसला लिया है।
पानी चोरी की जांच के लिए टीमें भी बना दी हैं। कनिष्ठ अभियंता की अगुवाई में मीटर रीडर और कीमैन शहर में बिछी पेयजल लाइनों की चेकिंग करेंगे। पेयजल कंपनी के अनुसार शहरभर में पेयजल लाइनों में कुल 969 चाबियां हैं। कीमैन रोजाना इन्हें खोलकर अपने-अपने एरिया में पानी की सप्लाई देते हैं। अब इन चाबियों की क्रमवार जांच होगी। एक चाबी के आगे की पेयजल लाइन में कुल कितने उपभोक्ता जुड़े हैं, इन्हें कितना पानी दिया जा रहा है, इसका पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
कंपनी के पास अभी अधिकृत उपभोक्ताओं का जो रिकॉर्ड है, उससे भी इसका मिलान होगा। यदि किसी पेयजल लाइन में अनुमान से अधिक पानी की खपत हो रही है तो उसकी जांच होगी। पेयजल लाइनों के निरीक्षण में कई फर्जी लाइनें जुड़ी होने का भी खुलासा हो सकता है। इन सबको कंपनी न सिर्फ हटा देगी बल्कि कानूनी कार्रवाई भी करेगी। एजीएम हरमेश भाटिया ने बताया कि हर चाबी से कितने उपभोक्ता को पानी सप्लाई हो रहा है, इसका रिकॉर्ड तैयार होगा।
चोरी या लीकेज, अब
बर्बाद नहीं होगा पानी
शहर में रोजाना सप्लाई के दौरान दस से 15 एमएलडी पानी कहां जा रहा है, जांच के बाद इसका खुलासा हो सकता है। कंपनी मानती है कि दो से चार एमएलडी पानी लीकेज में बह सकता है लेकिन दो साल में कंपनी ने सौ से अधिक लीकेज प्वाइंट दुरुस्त किए हैं। आजकल भी जो शिकायतें मिल रही हैं, उनमें भी तुरंत कार्रवाई हो रही है। इसके बावजूद 10 एमएलडी से ज्यादा पानी बिना बिलिंग के सप्लाई हो रहा है। यह कहां जा रहा है, इसका अब पता लगाया जाएगा। कंपनी का कहना है कि जांच के बाद यदि कोई लीकेज प्वाइंट मिलते हैं, तो उन्हें ठीक किया जाएगा। चोरी हो रहा पानी बंद होगा। इससे पानी की बचत होगी और उपभोक्ताओं को किल्लत नहीं आएगी।
शहर में 35 हजार से अधिक उपभोक्ता
शहर में पानी के 35 हजार से अधिक उपभोक्ता हैं। इनमें 25 हजार घरेलू उपभोक्ता शामिल हैं। शहर में पानी की कमी न रहे, इसके लिए कंपनी ने शहर के बाहर नए कनेक्शन देने पर भी रोक लगा रखी है।