राजधानी शिमला में जल संकट की मार अब बच्चों की पढ़ाई पर पढ़ने लगी है। कई स्थानों पर पिछले एक हफ्ते से पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी है। बच्चों की स्कूल वर्दी तक नहीं धुल पा रही है। ऐसे में बच्चों ने मैली वर्दी के साथ स्कूल जाने से मना कर दिया है। रविवार को शहर के कई इलाकों में पानी की सप्लाई नहीं हुई। लिहाजा स्कूल ड्रेस न धुलने के कारण बच्चे सोमवार को स्कूल नहीं जा सके।
मल्याणा वार्ड के फ्लावरडेल के बीना निकेतन में रहने वाली बिमला देवी ने बताया कि छह दिन से उनके मकान में पानी की सप्लाई नहीं हुई है। रविवार को देर रात तक पानी का इंतजार करते रहे लेकिन सप्लाई नहीं आई। बच्चों की स्कूल ड्रेस नहीं धुली इसलिए सोमवार को बच्चे स्कूल नहीं जा सके। बिमला देवी की तीन बेटियां हैं। एक बेटी आठवीं में पढ़ती है, एक तीसरी में और एक केजी में पढ़ रही है।
रविवार को बच्चों की ड्रेस नहीं धुल सकी, जिसकी वजह से तीनों बच्चे सोमवार को स्कूल नहीं गए। बिमला देवी ने बताया कि सोमवार को भी देर शाम तक पानी की सप्लाई नहीं हो पाई, बच्चों को मंगलवार को भी स्कूल से छुट्टी लेनी पड़ सकती है। घर में खाना बनाने के लिए भी पानी नहीं है। पड़ोसियों से पानी मांग कर खाना बनाना पड़ रहा है। कई जगह बच्चे छुट्टी लेकर पानी ढोने को मजबूर हैं।
प्रेशर कम होने से नहीं आ रहा पानी
बिमला देवी का कहना है कि उनके पड़ोस में रहने वाले लोगों के घरों में थोड़े बहुत पानी की सप्लाई हो रही है। लेकिन प्रेशर कम होने के कारण उनके घर में पानी नहीं आ रहा। की मैन से बार बार समस्या के समाधान का आग्रह किया जा रहा है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
नोडल अफसरों का जवाब ‘टैंक सूख गए हैं अब हम क्या करें’
पानी की किल्लत को लेकर नगर निगम के वार्ड स्तर पर तैनात नोडल अफसरों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। बिमला देवी ने बताया कि सोमवार को उन्होंने ‘अमर उजाला’ में छपी लिस्ट में अपने वार्ड के नोडल अफसर का नंबर ढूंढा और फोन लगाया। यह पूछने पर कि पानी की सप्लाई क्यों नहीं आ रही, जवाब मिला ‘जितना पानी है वह लोगों को बराबर बांटा जा रहा है, सप्लाई पूरी होने के बाद टैंक सूख गए हैं, अब हम भी क्या कर सकते हैं।’