एमसी के सदन का फैसला दरकिनार, पेयजल कंपनी ने फिर थोप दी एनओसी की शर्त
जलशक्ति विभाग की एनओसी पर मिलेगा कनेक्शन
एमसी ने साल 2017 में ही खत्म कर दी थी यह शर्त
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर के मर्ज एरिया के लोगों को पेयजल का नया कनेक्शन लेने के लिए अब फिर से एनओसी की शर्त पूरी करनी होगी। पेयजल कंपनी ने पांच साल बाद फिर से इस क्षेत्र के लोगों पर जलशक्ति विभाग से एनओसी लाने की शर्त थोप दी है। इस एनओसी के बाद ही नया कनेक्शन मिल पाएगा। एनओसी में यह बताना होता है कि संबंधित व्यक्ति के पास जल शक्ति विभाग का कोई कनेक्शन नहीं है।
नगर निगम सदन ने साल 2017 में जलशक्ति विभाग से एनओसी लाने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया था। इसके एक साल बाद बनी कंपनी ने भी बिना एनओसी कनेक्शन देने की प्रक्रिया चलाई। लेकिन अब अचानक पांच साल बाद फिर से यह एनओसी मांगी जा रही है। लोगों को एनओसी देकर बताना होगा कि उनके पास जलशक्ति विभाग का पेयजल कनेक्शन नहीं है।
मज्याठ पार्षद दिवाकर देव शर्मा के अनुसार वार्ड में जिन लोगों के पास कोई भी कनेक्शन नहीं हैं, उनसे भी एनओसी के लिए जलशक्ति विभाग के चक्कर कटवाए जा रहे हैं। एनओसी न दे पाने से इनकी फाइलें कंपनी में धूल फांक रही है। कंपनी का कहना है कि इस क्षेत्र में अभी भी जलशक्ति विभाग के सैकड़ों उपभोक्ता हैं। इसलिए नया कनेक्शन देने से पहले एनओसी ली जा रही है। कंपनी का कहना है कि कई पार्षदों की आपत्तियों के बाद अब इस मामले पर 27 जनवरी को होने वाली पेयजल कंपनी की सब कमेटी की बैठक चर्चा की जाएगी। यदि कमेटी अनुमति देती है तो बिना एनओसी नए कनेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शहर के टुटू, मज्याठ, मशोबरा, मल्याणा, पंथाघाटी, कच्चीघाटी, ढली आदि क्षेत्र मर्ज एरिया में शामिल हैं।
चार साल में ही एमसी
पर भारी पड़ गई कंपनी
भाजपा शासित नगर निगम ने साल 2018 में पेयजल कंपनी का गठन किया था। शहर में पेयजल व्यवस्था सुधारने और विश्व बैंक प्रोजेक्ट के नाम पर यह कंपनी बनाई गई। तब दावा किया कि सदन के फैसले के अनुसार कंपनी काम करेगी। इस कंपनी में नगर निगम का 51 फीसदी शेयर है, लेकिन यह शेयर अब नाम का ही रह गया है। सदन में लिए गए ज्यादातर फैसले कंपनी नहीं मान रही। इससे पहले पेयजल स्लैब बढ़ाने, शहर के बाहर भी सस्ता पानी देने, जलशक्ति के कनेक्शन नगर निगम में बदलने जैसे सदन के फैसले लटके पड़े हैं। कंपनी का स्पष्ट कहना है कि निदेशक मंडल में होने वाले फैसले ही लागू होंगे। सदन में लिए जाने वाले फैसलों की कंपनी अपने स्तर पर समीक्षा करेगी और कंपनी के हक में पाए जाने पर ही इन्हें लागू करेगी।
बैठक में देखेंगे क्या
मामला है : निदेशक
पेयजल कंपनी के स्वतंत्र निदेशक दिग्विजय चौहान ने कहा कि नए कनेक्शन क्यों नहीं मिल रहे, मुझे मामले की जानकारी नहीं है। 27 जनवरी को सब कमेटी की बैठक होनी है जिसमें इस मामले पर चर्चा होगी। यदि नगर निगम सदन ने इस बारे में कोई फैसला लिया था तो उस पर जरूर बात होगी। लोगों की सुविधा का ध्यान रखा जाएगा।