शिमला। राजधानी में मोबाइल मैसेज के जरिये पहली बार जारी हुए कूड़े के भारी भरकम बिलों ने शहरवासियों के होश उड़ा दिए हैं। अचानक हजारों रुपये का बिल देखकर लोग हैरान हैं। इन्हें 30 सितंबर से पहले यह बिल जमा करवाना होगा। न चुकाने पर नगर निगम अगले महीने एक फीसदी ब्याज समेत यह शुल्क वसूलेगा।
शहर में सैकड़ों भवन ऐसे हैं जो सालों से बंद पड़े हैं। इनसे आज तक कूड़ा शुल्क नहीं लिया जाता था। निगम ने पिछले कई सालों का शुल्क जोड़कर इन्हें बिल जारी कर दिया है। कई भवनों में खाली पडे़ किराएदारों के कमरों का गारबेज शुल्क भी जारी किया गया है। ये अब भवन मालिक को चुकाना होगा। कई भवन मालिक ऐसे हैं जो साल या महीने में एक-दो बार ही शिमला आते हैं, इन्हें भी पिछला पूरा शुल्क चुकाना पड़ेगा। हजारों रुपये का बिल देखने के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब वे शहर में रहते ही नहीं तो निगम किस बात का शुल्क ले रहा है। रामबाजार, सब्जीमंडी समेत कई इलाकों में पिछले सात महीने से गारबेज शुल्क वसूला ही नहीं गया था। इन्हें भी एकसाथ गारबेज शुल्क के बिल जारी किए गए हैं। एकसाथ कई महीनों और सालों की शुल्क वसूली की सबसे ज्यादा मार व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर पड़ रही है।
शुल्क वसूली के पीछे निगम का यह तर्क
निगम प्रशासन का कहना है कि लोग केबल, बिजली और पानी का न्यूनतम शुल्क या बिल भी जमा करवाते हैं। चाहे फिर वे शहर में रहें या न रहें। दूसरा जब भी महीने बाद लोग अपने इन घरों में आते हैं तो इनसे निकलने वाला कूड़ा शहर में ही कहीं फेंकते हैं, जिसे बाद में निगम उठाता है। इसके एवज में सभी से शुल्क लिया जा रहा है। शहर में पहले निगम करीब 40 हजार लोगों से गारबेज शुल्क लेता था, लेकिन नई आनलाइन व्यवस्था के बाद करीब 58 हजार लोगों से शुल्क वसूला जाएगा।
शुल्क जमा करवाने को मिलेगा एक महीना
नगर निगम का कहना है कि लोगों की सुविधा के लिए शुल्क जमा करवाने को एक महीने का वक्त दिया जा रहा है। मोबाइल पर भेजे लिंक पर क्लिक कर लोग ऑनलाइन ही बिल जमा कर सकते हैं। निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुरेखा चोपड़ा का कहना है कि लोग ऑनलाइन बिल भुगतान कर सकते हैं।