नरेंद्र मोदी सरकार में वित्त और रक्षा मंत्री बने अरुण जेटली के खिलाफ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आपराधिक मानहानि का केस वापस ले लिया है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और उनके पुत्रों अनुराग ठाकुर एवं अरुण धूमल के खिलाफ केस जारी रहेगा। बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसकी पुष्टि की।
सरकार की ओर से तर्क दिया गया है कि अरुण जेटली के भारत सरकार में ताकतवर मंत्री बनने के बाद केंद्र और राज्य के बीच संबंधों के लिए भी केस का जारी रहना ठीक नहीं था। इसलिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने खुद पहल करते हुए ये कदम बढ़ाया है।
चंबा का साईकोठी बिजली प्रोजेक्ट हैदराबाद के व्यवसायी वकामुल्ला चंद्रशेखर को देने और फिर वकामुल्ला से लोन लेने के मामले में अरुण जेटली और धूमल पुत्रों ने वीरभद्र सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
इसके खिलाफ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 16 जनवरी 2014 को इनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का दावा शिमला के चक्कर स्थित जिला न्यायालय में दायर किया था। हालांकि, तब से अब तक इस मामले में न तो अरुण जेटली को नोटिस हुआ था और न ही धूमल और उनके पुत्रों को।
केस दायर करने के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपने सरकारी निवास में प्रेसवार्ता कर कहा था कि अरुण जेटली और धूमल परिवार ने झूठे आरोप लगाकर उनकी और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाया है।
इसके बाद वीरभद्र सिंह ने दिल्ली में यही बात हाईकमान के सामने भी दोहराई थी। अब सूत्र बता रहे हैं कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जल्द ही अरुण जेटली से मिलने और उन्हें बधाई देने के लिए दिल्ली जा रहे हैं।