हाईकोर्ट के फैसले में भी इसका हवाला दिया गया है। इस रिपोर्ट में एक्सटेंशन ऑफ टाइम (ईओटी) कमेटी के हवाले से बताया गया है कि विमल नेगी को कंपनी की ओर से देरी के दिवसों को 45 से घटाकर 23 दिन करने के लिए मजबूर किया गया। इस दौरान उन्हें आप प्रॉब्लम में आ जाओगे... जैसी धमकियां भी दी थीं। रिपोर्ट में यह उल्लेख है कि देसराज समिति के सदस्य न होने के बावजूद हस्तक्षेप कर रहे थे। बयानों में कहा है कि विमल नेगी पर परियोजना का राजस्व अनुमान 19 करोड़ से बढ़ाकर 25 करोड़ करने का दबाव डाला।
नेगी पर कंपनी को 10 फीसदी भुगतान जारी करने के लिए लगातार दबाव डाला जा रहा था, जबकि ईओटी को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की ओर से अनुमोदित नहीं किया था। रिपोर्ट के अनुसार दो अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर कंपनी को 10 फीसदी भुगतान जारी करने के लिए साजिश रची गई। रिपोर्ट में पावर कॉरपोरेशन में कुप्रबंधन और वित्तीय गड़बड़ी, कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने और विभिन्न समितियों पर अफसरों की ओर से दबाव डालने का उल्लेख है।